उच्च न्यायलय का ठाणे महानगर पालिका को सख्त आदेश 

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उच्च न्यायलय का ठाणे महानगर पालिका को सख्त आदेश

मृत सीवर सफाई कर्मचारियों के परिजनों को तत्काल मुआवजे का निर्देश। मेधा पाटकर की अध्यक्षता वाली श्रमिक संगठना कर रही थी मामले की पैरवी

योगेश पाण्डेय – संवाददाता 

ठाणे : मुंबई उच्च न्यायालय ने ठाणे शहर के सीवर में काम करने के दौरान मरने वाले सफाईकर्मियों के परिजनों को तत्काल मुआवजा देने का अंतरिम आदेश ठाणे महानगर पालिका को दिया है। ठाणे जिले में अलग-अलग घटनाओं में सीवर की सफाई के दौरान 10 सफाईकर्मियों की मौत हो गई। श्रमिक संघ अपने उत्तराधिकारियों के लिए मुआवजे की लगातार मांग कर रहे थे,लेकिन ठाणे महानगर पालिका की ओर से मुआवजा देने में टालमटोल पर मेधा पाटकर की अध्यक्षता वाले श्रमिक जनता संघ ने इसके खिलाफ उच्च न्यायालय में अपील दायर की थी।

मामले की सुनवाई 18 जुलाई, 2023 को न्यायमूर्ति संदीप मार्ने और न्यायमूर्ति धीरज ठाकुर की पीठ के समक्ष हुई। श्रमिक जनता संघ की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता गायत्री सिंह और ठाणे महानगर पालिका की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता आप्टे उपस्थित हुए। सुप्रीम कोर्ट के 27 मार्च 2014 के आदेश के मुताबिक, महानगर पालिका मृत कर्मचारियों के परिवारों को 10-10 लाख रुपये देने के लिए बाध्य है, लेकिन महानगर पालिका उनसे विरासत अधिकार प्रमाणपत्र की मांग कर उन्हें मुआवजा देने में समय लगा रही है। मृत मजदूर अमित पुवाल के माता-पिता को प्रमाण पत्र देने के बाद 4 साल बाद मुआवजा मिला। यह नैसर्गिक न्याय के अनुरूप नहीं है।

ट्रेड यूनियन ने अदालत में दलील दी कि मुआवजे का उद्देश्य सफाईकर्मी की मृत्यु के बाद उसके परिवार की मदद करना है। कोर्ट ने इस दलील को स्वीकार कर लिया। संघ के महासचिव जगदीश खैरालिया के अनुसार, अदालत ने आदेश दिया कि महानगर पालिका अपने अधिकार क्षेत्र के तहत मृत श्रमिकों के उत्तराधिकारियों का प्रारंभिक सत्यापन करे और यदि परिवार के किसी भी सदस्य को कोई आपत्ति नहीं है, तो मुआवजा दिया जाए। प्रमाणपत्र मांगे बिना भुगतान किया जाए। अदालत का यह आदेश उन सफाईकर्मियों के परिवारों के लिए बड़ी राहत लेकर आया है जिनकी नालों की सफाई के दौरान पर्याप्त सुरक्षा उपकरणों के अभाव में दम घुटने से मौत हो गई थी। उन्होंने यह भी कहा कि इस मामले में श्रमिक जनता संघ के साथ म्यूज़ फाउंडेशन के कार्यकर्ताओं ने यह कदम उठाया था। संघ अध्यक्ष मेधा पाटकर ने कहा, यह दलित-उत्पीड़ित श्रमिकों की न्याय की मांग के लिए श्रमिक जनता संघ द्वारा हर स्तर पर किए गए प्रयासों और संघर्ष की जीत है।

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