पिता की बीमारी के दौरान सरकारी खर्चे पर विदेश यात्रा करने वालों के मुंह से ज्ञान की बातें बिल्कुल अच्छी नहीं लगती – आशीष शेलार 

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पिता की बीमारी के दौरान सरकारी खर्चे पर विदेश यात्रा करने वालों के मुंह से ज्ञान की बातें बिल्कुल अच्छी नहीं लगती – आशीष शेलार 

उपमुख्यमंत्री फडणवीस के जापान दौरे को लेकर आदित्य ठाकरे के बयान पर भड़के आशीष शेलार। ट्विटर के जरिये कहा बचपना छोडें आदित्य ठाकरे 

योगेश पाण्डेय – संवाददाता 

मुंबई – शिवसेना नेता और राज्य के पूर्व मंत्री आदित्य ठाकरे द्वारा उपमुख्यमंत्री देवेन्द्र फड़णवीस की जापान यात्रा को लेकर की गई आलोचना से लगता है कि एक बार फिर ठाकरे और भाजपा आमने-सामने आ गए हैं। मुंबई भाजपा अध्यक्ष आशीष शेलार ने आदित्य ठाकरे की आलोचना का जवाब एक्स (ट्विटर) के जरिये कड़ी आलोचना करते हुए लिकहा है कि जो व्यक्ति अपने पिता के बीमार रहते हुए सरकारी पैसे पर लंदन में मौज करता है, उसे दूसरों को ज्ञान नहीं सिखाना चाहिए। उन्होंने यह भी दोहराया कि फड़णवीस की यात्रा का खर्च जापान सरकार द्वारा वहन किया गया था।

मुंबई में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में शिवसेना नेता और पूर्व मंत्री आदित्य ठाकरे ने मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फड़नवीस की विदेश यात्राओं की आलोचना करते हुए कहा था कि नागरिकों के पैसे पर विदेशी दौरों पर मत खर्च करो। साथ ही उन्होंने जीआर दिखाकर उपमुख्यमंत्री देवेन्द्र फड़णवीस की जापान यात्रा पर हुए खर्च को लेकर शिंदे-फडणवीस सरकार पर भी निशाना साधा।

आशीष शेलार ने आदित्य ठाकरे की आलोचना का जवाब देते हुए कहा कि उपमुख्यमंत्री देवेन्द्र फड़णवीस की जापान यात्रा का पूरा खर्च जापान सरकार ने वहन किया था, वह वहां सरकारी मेहमान बनकर गये थे। अतिथि के रूप में आमंत्रित किये जाने पर उसका सारा खर्च उस देश की सरकार द्वारा वहन किया जाता है। महाराष्ट्र सरकार ने केवल साथ आए अधिकारियों का खर्च उठाया है। जापान दौरे के दौरान फड़णवीस की उपलब्धियों और निवेश की पूरी जानकारी उनके सोशल मीडिया पर उपलब्ध है। उपमुख्यमंत्री के जापान दौरे से राज्य में भारी निवेश की ओर भी शेलार ने सबका ध्यान आकर्षित किया।

आशीष शेलार ने जापानी वाणिज्य दूतावास का एक पत्र संलग्न करते हुए आदित्य ठाकरे को करारा जवाब दिया। उन्हीने यह भी कहा कि एक व्यक्ति जो अपने पिता के बीमारी के दौरान सरकारी पैसे पर लंदन में ऐश करता है, उसे दूसरों को ज्ञान नहीं सिखाना चाहता। हालांकि माना कि यह बचपना है लेकिन चरमोत्कर्ष तक नहीं पहुंच पाते।

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