ठेका कर्मचारियों के अनुबंध को लेकर गर्मायी सियासत। मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री आमने सामने

ठेका कर्मचारियों के अनुबंध को लेकर गर्मायी सियासत। मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री आमने सामने

गृहमंत्रालय द्वारा कॉन्ट्रैक्ट पर पुलिस भर्ती को हरि झंडी, तों फडणवीस की शिंदे द्वारा संविदा कर्मचारियों की भर्ती पर रोक लगाने की मांग

योगेश पाण्डेय – संवाददाता 

मुंबई : राज्य में सरकारी कर्मचारियों को अनुबंध के आधार पर भर्ती करने के फैसले पर ब्रेक लगने की संभावना है। इस संबंध में राज्य सरकार की ओर से 14 मार्च को अधिसूचना जारी की गयी थी। हालांकि अब उपमुख्यमंत्री देवेन्द्र फड़णवीस ने मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे को पत्र भेजकर इस फैसले को रद्द करने का अनुरोध किया है। इन संविदा कर्मचारियों की भर्ती के लिए निजी कंपनियों को नियुक्त किया गया था। देवेंद्र फड़नवीस ने राज्य सरकार की अधिसूचना में उल्लिखित वेतन दर में त्रुटि होने का मुद्दा उठाते हुए इस फैसले को तत्काल रद्द करने की मांग की है। इसलिए राज्य में सरकारी कर्मचारियों की संविदा के आधार पर भर्ती करने के फैसले पर ब्रेक लग जाएगा।

प्रशासनिक खर्चों को नियंत्रण में रखते हुए विकास कार्यों के लिए पर्याप्त धन उपलब्ध कराने के लिए जहां भी संभव हो काम को आउटसोर्स करना सरकार की नीति है। अत: वित्त विभाग की सहमति से मे.ब्रिस्क फैसिलिटीज प्राइवेट लिमिटेड और क्रिस्टल इंटीग्रेटेड सर्विसेज प्रा. लिमिटेड इन दोनों बोलीदाताओं के पैनल को तीन साल की अवधि के लिए मंजूरी दी गई है। साथ ही सरकार के अन्य विभागों को उक्त सरकारी निर्णय के तहत गठित पैनल में एजेंसियों की सेवाएं लेने की अनुमति दी गई थी। संबंधित शासन निर्णय के अनुसार उक्त निविदा प्रक्रिया में कुल 26 निविदाकारों ने भाग लिया। उनमें से निविदा समिति ने निम्नलिखित 10 निविदाकारों को योग्य बनाया। इसमें एक्सेट टेक सर्विसेज लिमिटेड, सी.एम.एस. आईटी सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड, सी.एस.सी. ई-गवर्नेंस सर्विसेज इंडिया लिमिटेड, इनोवेव आयटी इन्फ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड, क्रिस्टल इंटग्रेटेड सर्व्हिसेस प्रायव्हेट लिमिटेड, एस-२ इन्फोटेक इंटरनॅशनल लिमिटेड, सैनिक इंटेलिजन्स सिक्युरिटी प्रायव्हेट लिमिटेड, सिंग इंटेलिजन्स सिक्युरिटी सर्व्हिसेस प्रायव्हेट लिमिटेड, उर्मिला इंटरनॅशनल सर्व्हिसेस प्रायव्हेट लिमिटेड का सामवेश था।

एक ओर जहां देवेंद्र फड़नवीस ने सरकारी कर्मचारियों की अनुबंध भर्ती के फैसले को रद्द करने की मांग की है, वहीं दूसरी ओर गृह विभाग ने मुंबई पुलिस बल में 3000 अनुबंध पुलिसकर्मियों की भर्ती करने का फैसला किया है। यह भर्ती राज्य सुरक्षा निगम के माध्यम से अधिकतम 11 महीने की अवधि के लिए अनुबंध के आधार पर की जाएगी और यह अपनी तरह का पहला निर्णय है। गृह विभाग ने पुलिस आयुक्त के अनुरोध पर यह निर्णय लिया है क्योंकि मुंबई पुलिस में जनशक्ति की भारी कमी है। मुंबई पुलिस बल के लिए कांस्टेबल से सहायक निरीक्षक तक के 40,623 पद स्वीकृत किए गए हैं। इनमें से 10 हजार पद खाली हैं और रोजमर्रा के कामकाज के लिए कर्मचारियों की कमी है, इसी पृष्ठभूमि में पुलिस में संविदा भर्ती का निर्णय लिया गया है।

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