सांसद गजानन कीर्तिकर के नेतृत्व में गोरेगांव अग्निकांड पीड़ितों ने की मुख्यमंत्री से मुलाकात 

Spread the love

सांसद गजानन कीर्तिकर के नेतृत्व में गोरेगांव अग्निकांड पीड़ितों ने की मुख्यमंत्री से मुलाकात 

मुख्यमंत्री का ऐलान घायलों का ईलाज मुख्यमंत्री चिकित्सा सहायता निधि के अंतर्गत होगा। पीड़ितों के पुनर्वसन के लिए प्रति परिवार 50 हजार की राशि तत्काल प्रदान करने का निर्देश 

योगेश पाण्डेय – संवाददाता 

मुंबई – राज्य के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने गोरेगांव उन्नत नगर स्थित जय भवानी एसआरए इमारत में आग लगने की घटना से पीड़ित परिवारों को उनके पुनर्वसन के लिए प्रति परिवार 50,000 रुपये तत्काल वितरित करने का निर्देश दिया। साथ ही मुख्यमंत्री ने मुंबई महानगर पालिका आयुक्त को इस ईमारत की जलापूर्ति को तुरंत सुचारु करने और आपातकालीन मार्ग के रूप में एसआरए ईमारतों के बाहर लोहे की सीढ़ियां लगाने की नीति तैयार करने के निर्देश दिये हैं।

दुर्घटनाग्रस्त जय भवानी एसआरए इमारत के निवासियों ने स्थानीय सांसद गजानन कीर्तिकर के नेतृत्व में मुख्यमंत्री शिंदे से उनके वर्षा आवास पर मुलाकात की। इस अवसर पर मुंबई मनपा आयुक्त चहल, स्लम पुनर्विकास प्राधिकरण के मुख्य कार्यकारी अधिकारी सतीश लोखंडे समेत कई अधिकारी उपस्थित रहे। इस मौके पर मुख्यमंत्री ने क्षेत्रवासियों से बातचीत की और उन्हें सांत्वना दी।

हादसे में घायलों का निजी अस्पताल में इलाज चल रहा है, मुख्यमंत्री शिंदे ने कहा कि ईलाज का सारा भुगतान मुख्यमंत्री चिकित्सा सहायता निधि के माध्यम से किया जाएगा। इस बिल्डिंग का स्ट्रक्चरल और फायर ऑडिट तुरंत कराया जाए। इसके बाद भवन का रंग-रोगन कराना चाहिए। मुख्यमंत्री ने मरम्मत प्रक्रिया में तेजी लाने का भी निर्देश दिया ताकि इमारत में पानी की आपूर्ति जल्द से जल्द शुरू हो सके।

अधिकारियों को निवासियों क़ो आपदा से निपटने और उनके जीवन के पुनर्निर्माण के लिए तत्काल सहायता प्रदान करने का निर्देश दिया गया। इस मौके पर मुख्यमंत्री ने प्रति परिवार 50 हजार रुपये देने का निर्देश दिया। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से कहा कि जहां एसआरए भवन हैं, वहां आपातकालीन मार्ग के रूप में बाहर से लोहे की सीढ़ियां लगाने की नीति तैयार करें। साथ ही मुख्यमंत्री ने रहिवासियों को कपड़ों के गट्ठर रखने के लिए अलग से गोदाम उपलब्ध कराने की व्यवस्था करने का भी निर्देश दिया, ताकि पार्किंग स्थल या अन्य खुली जगह पर गट्ठर न रखें जाएं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: Content is protected !!
Right Menu Icon