जबरन वसूली मामले में निलंबित डीसीपी की बहाली का मार्ग प्रशस्त

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जबरन वसूली मामले में निलंबित डीसीपी की बहाली का मार्ग प्रशस्त

शिंदे सरकार ने बदला तत्कालीन मवीआ सरकार का फैसला। सौरभ त्रिपाठी को पिछले साल मार्च में निलंबित किया गया था 

योगेश पाण्डेय – संवाददाता 

मुंबई – बलपूर्वक जबरन वसूली के आरोप में पिछले साल ठाकरे सरकार द्वारा निलंबित किए गए पुलिस उपायुक्त सौरभ त्रिपाठी का निलंबन शिंदे सरकार ने वापस ले लिया है। यह निर्णय मुख्य सचिव की अध्यक्षता वाली समिति ने लिया है। पिछले साल मार्च महीने में उन्हें सस्पेंड कर दिया गया था।

अंगड़िया व्यापारियों से रंगदारी वसूलने के मामले में आईपीएस अधिकारी और मुंबई के पुलिस उपायुक्त सौरभ त्रिपाठी के खिलाफ पिछले साल मामला दर्ज किया गया था। इसके बाद राज्य के गृह विभाग ने उनके निलंबन के लिए तत्कालीन मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को प्रस्ताव भेजा था। इस प्रस्ताव पर हस्ताक्षर कर 22 मार्च 2022 को त्रिपाठी को निलंबित कर दिया गया था।

इस मामले में उनके खिलाफ केस दर्ज होने के बाद वह लापता हो गए। 16 मार्च 2022 को मुंबई पुलिस की क्राइम ब्रांच ने उन्हें फरार घोषित कर दिया। पुलिस को त्रिपाठी के खिलाफ कई अहम सबूत भी मिले थे, इसी बीच डीसीपी सौरभ त्रिपाठी ने शिकायतकर्ता को फोन किया और शिकायत वापस लेने का दबाव बनाया। इस संबंध में ऑडियो क्लिप भी मुंबई पुलिस के हाथ लगी है।

इसी दौरान सौरभ त्रिपाठी ने गिरफ्तारी से बचने के लिए स्थानीय अदालत में गिरफ्तारी पूर्व जमानत के लिए दौड़ लगाई। इस याचिका में उन्होंने अपने ऊपर लगे आरोपों से इनकार करते हुए कहा था कि हमें नहीं पता था कि थानेदार अंगड़िया से पैसा वसूल रहा है, एफआईआर में हमारा नाम नहीं।

मामले में क्राइम ब्रांच ने 4 आरोपियों को गिरफ्तार किया था, उनमें से 3 पुलिस अधिकारी थे। गिरफ्तार पुलिस इंस्पेक्टर ओम बांगटे से पूछताछ के दौरान डीसीपी सौरभ त्रिपाठी का नाम सामने आया। इसके बाद त्रिपाठी के खिलाफ मामला दर्ज कर निलंबन की कार्रवाई की गयी।

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