बढ़ती जनसंख्या के चलते भविष्य में लोकसभा और राज्यसभा की सीटें बढ़ेंगी। नए संसद भवन में सांसदों के लिए ज्यादा सीटें, नरेंद्र मोदी की दूरदर्शिता का परिचय – अजित पवार

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बढ़ती जनसंख्या के चलते भविष्य में लोकसभा और राज्यसभा की सीटें बढ़ेंगी। नए संसद भवन में सांसदों के लिए ज्यादा सीटें, नरेंद्र मोदी की दूरदर्शिता का परिचय – अजित पवार

भाजपा को लेकर शरद पवार से बिल्कुल ही अलग है अजित पवार की राय। फिर बांधे भाजपा की तारीफों के पुल

योगेश पाण्डेय – संवाददाता 

मुंबई – नए संसद भवन के उद्घाटन कार्यक्रम का कई विपक्षी दलों समेत राकांपा ने भी बहिष्कार किया था। वहीं अब राकांपा नेता अजित पवार ने विपक्षी दलों के विपरीत नए संसद भवन की जमकर तारीफ करते हुए कहा है कि सभी सांसदों को एक साथ मिलकर देश की जनता के लिए काम करना चाहिए और उनकी समस्याओं का निराकरण करना चाहिए। रविवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने नई संसद भवन को देश को समर्पित किया।

नए संसद भवन की लोकसभा में 888 सदस्यों के लिए सीटें हैं जबकि पुरानी संसद में 543 सीटें ही थी। अजित पवार ने कहा कि यदि नए संसद भवन को किसी भी राजनितिक एंगल से नहीं देखा जाए तो यही समझ आता है कि अंग्रेजों ने इस ईमारत का निर्माण करवाया था। बहुत सारे राज्यों ने आजादी के बाद अपना विधान भवन बनवाया। महाराष्ट्र में भी 1980 में विधान भवन बना। अब हमारे बीच चर्चा चल रही है की महाराष्ट्र में नया विधान भवन बनाया जाना चाहिए।

पवार ने आगे कहा कि देश की जनसंख्या लगातार बढ़ रही है, आजादी के बाद जनसंख्या तेजी से बढ़ी है। ऐसे में लोकसभा और राज्यसभा की सीटों में भी इजाफा होगा, इसलिए नये संसद भवन की जरुरत थी। अजित पवार ने ईमारत निर्माण की भी तारीफ करते हुए कहा कि इस ईमारत का निर्माण रिकॉर्ड टाइम में पूरा कर लिया गया। कोरोना काल में भी इसका काम जारी रहा और आज हमारे पास एक बड़ा और बेहतरीन संसद भवन है। सभी को संविधान के अनुसार काम करना चाहिए और आम जनता की समस्याओं का समाधान करना चाहिए।

ज्ञात हो कि राकांपा अध्यक्ष और अजित पवार के चाचा शरद पवार ने भी नए संसद भवन के उद्घाटन कार्यक्रम का विरोध किया था और बहिष्कार का ऐलान किया था। उन्होंने कहा था कि नए संसद भवन का उद्घाटन राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मू के हाथो करवाया जाना चाहिए था। उद्घाटन के बाद भी शरद पवार ने कहा था कि अच्छा हुआ की मैं वहाँ नहीं गया, जहां देश को पीछे धकेलने का काम किया जा रहा है। वहाँ जो कुछ भी हुआ उसे देखकर दुख हुआ। उन्होंने कहा जिस सदन का मैं सदस्य हूँ, उसके सभापति को ही इस कार्यक्रम में नहीं बुलाया गया, यह बेहद निंदनीय है।

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