भाजपा नेता किरीट सोमैया को तगड़ा झटका

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भाजपा नेता किरीट सोमैया को तगड़ा झटका

अनिल परब के साईं रिसोर्ट को लेकर दायर याचिका को ग्रीन ट्रिब्यूनल ने किया ख़ारिज। परब का दावा नाक रगड़कर माफ़ी मांगेगे सोमैया

योगेश पाण्डेय – संवाददाता 

मुंबई – भाजपा नेता किरीट सोमैया ने ग्रीन ट्रिब्यूनल में याचिका दायर कर रत्नागिरी के दापोली बीच पर अवैध रूप से बनाए गए साई रिजॉर्ट को गिराने की मांग की थी। हालांकि इस याचिका को ग्रीन आर्बिट्रेटर ने खारिज कर दिया है।

इसे लेकर ठाकरे गुट के नेता अनिल परब ने किरीट सोमैया पर हमला बोला है। सोमवार को पत्रकार परिषद में इसकी जानकारी देते हुए परब ने बताया कि किरीट सोमैया साई रिजॉर्ट को गिराने के लिए ग्रीन आर्बिट्रेशन के पास गये थे, जब मामलें की जाँच में पाया गया कि यह महज अपवाद भर है, इसमें कोई तथ्य नहीं है। तब जज ने कहा कि इस मामले में कोई दम नहीं है, इसलिए जज ने कहा है कि वह केस खारिज कर रहे हैं।

अनिल परब ने कहा कि किरीट सोमैया ने याचिका वापस ले ली क्योंकि न्यायाधीश के अवलोकन के बाद उन्हें एहसास हो गया कि वे खुद अपनी बदनामी करवा रहे हैं। अब मामला हाईकोर्ट में है। किरीट सोमैया को हाईकोर्ट से भी अपनी याचिका वापस लेनी होगी या फिर कोर्ट ही केस खारिज कर देगा।

ग्रीन आर्बिट्रेशन में सुनवाई को लेकर अनिल परब ने कहा कि किरीट सोमैया ने आरोप लगाया था कि रिजॉर्ट का गंदा पानी समुद्र में बहाया जाता है। हालाँकि एक रिसॉर्ट का अपशिष्ट जल जो विकसित नहीं हुआ है, समुद्र में कैसे जा सकता है? किरीट सोमैया ने इस तरह के झूठे आरोप लगाकर मुझे बदनाम करने का प्रयास किया है। हालांकि, हमें अदालत में न्याय मिलेगा और किरीट सोमैया को हमसे नाक रगड़ कर माफ़ी मांगनी पड़ेगी। साथ ही हमने किरीट सोमैया के खिलाफ 100 करोड़ रुपये का मानहानि का मुकदमा भी दायर किया है। किरीट सोमैया को या तो माफी मांगनी होगी या 100 करोड़ रुपये चुकाने होंगे।

अनिल परब ने कहा केंद्रीय प्रदूषण बोर्ड और सरकार ने एक रिपोर्ट दी है जिसमें साफ कहा गया है कि साई रिज़ॉर्ट से कोई अपशिष्ट निर्वहन नहीं होता है। सत्र न्यायालय ने इस मामले में मुकदमा वापस ले लिया है। जिस अपराध के आधार पर बाकी साजिशें रची गईं, वे सभी झूठी साबित हुई हैं। इसी मुख्य अपराध के आधार पर ईडी ने जांच शुरू की थी। हालाँकि इस मामले को वापस लेने के बाद, एक और झूठा मामला दायर किया गया था कि एक पूरी इमारत का निर्माण किया गया था जबकि आधी इमारत की अनुमति दी गई थी। ये आरोप ठाकरे सरकार को बदनाम करने के लिए लगाए गए थे। किरीट सोमैया के सभी आरोप राजनीति से प्रेरित हैं।

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