ठाकरे बन्धुओं की नजदीकियां, सत्ताधारियों के लिए बन सकती हैं मुसीबत 

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ठाकरे बन्धुओं की नजदीकियां, सत्ताधारियों के लिए बन सकती हैं मुसीबत 

शिंदे की शिवसेना में सब कुछ ठीक नहीं, ठाकरे नाम का ही सहारा। मनसे अध्यक्ष से मिलने शिवतीर्थ पहुंचे मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे

योगेश पाण्डेय – संवाददाता 

मुंबई : राज्य में चाल रही सियासी उठापठक को देखते हुए यह नहीं कहा जा सकता की कौन सा ऊंट किस करवट बैठेगा। राकांपा की सत्ता में भागीदारी के चलते मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की शिवसेना सकते में है, भले ही दावा किया जा रहा हो की सबकुछ ठीक है, लेकिन वास्तविकता इससे बिल्कुल परे है। राज्य के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने मनसे अध्यक्ष राज ठाकरे से उनके आवास शिवतीर्थ पर मुलाकात की है। राकांपा नेता अजित पवार के विपक्ष के नेता पद से इस्तीफा देकर सीधे तौर पर सरकार को समर्थन देने और सत्ता में भागीदारी का रुख अपनाने से राज्य में राजनीतिक माहौल गरमा गया है। इस पृष्ठभूमि में मुख्यमंत्री शिंदे की राज ठाकरे से मुलाकात अहम मानी जा रही है।

कहा जा रहा है कि अजित पवार के सत्ता में भागीदारी के फैसले से महा विकास अघाड़ी कमजोर हो गई है। ऐसे में एक बार फिर से राज ठाकरे और शिवसेना प्रमुख बाला साहेब ठाकरे की पार्टी उद्धव ठाकरे के बीच मेल-मिलाप की चर्चा छिड़ गई है। ठाणे मनसे नेता अभिजीत पानसे ने ठाकरे की पार्टी शिवसेना के सांसद संजय राउत से मुलाकात की थी। कहा जा रहा है कि इस बैठक में मनसे ने उद्धव के नेतृत्व वाली शिवसेना को गठबंधन का प्रस्ताव भेजा है। अगर दोनों ठाकरे भाई, राज और उद्धव एक साथ आते हैं, तो वे सत्तारूढ़ पार्टी के लिए बड़ा सिरदर्द बन सकते हैं। हालांकि, संभावना जताई जा रही है कि यह समीकरण उभरकर सामने न आए, इसके लिए सावधानी बरतते हुए एकनाथ शिंदे ने शुक्रवार को राज ठाकरे से मुलाकात की।

इस बीच मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के बाद एकनाथ शिंदे ने पिछले साल कई बार राज ठाकरे से मुलाकात कर उनके करीब आने की कोशिश की है। हालांकि, इन दोनों नेताओं की नजदीकियां अभी तक राजनीतिक गठबंधन में नहीं बदल पाई है। इस तरह भाजपा और शिवसेना के नेतृत्व वाली राज्य सरकार में अजित पवार की पार्टी राकांपा की भागीदारी से पूरी राजनीतिक तस्वीर बदल गई है। ऐसे में संकेत मिल रहे हैं कि पिछले साल गठबंधन सरकार के साथ नजर आ रहे राज ठाकरे आने वाले दिनों में महाविकास अघाड़ी के करीब आ सकते हैं। लेकिन शुक्रवार की बैठक के बाद यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या राज ठाकरे अपनी पिछली भूमिका पर कायम रहते हैं, या सत्ताधारियों के खिलाफ आक्रामक रुख अपनाते हैं।

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