ठाणे स्थित येऊर में अवैध टर्फक्लबों पर ठामपा की कार्यवाई, 5 क्लबों को किया सील

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ठाणे स्थित येऊर में अवैध टर्फक्लबों पर ठामपा की कार्यवाई, 5 क्लबों को किया सील

ठामपा की कार्यवाई से क्लब मालिकों में ह्ड़कंप, तो पर्यावरणविदों ने पालिका प्रशासन पर मुंहदेखी कार्यवाई करने का लगया आरोप 

योगेश पाण्डेय – संवाददाता 

ठाणे – ठाणे मनपा प्रशासन ने आखिरकार दर्शनीय येऊर में चल रहे अवैध टर्फ क्लब को सील कर दिया है। टेनिस, क्रिकेट, फुटबॉल जैसे खेलों के लिए देर रात तक किराए पर दिए जाने वाले टर्फ क्लबों पर कार्रवाई से टर्फ संचालकों को बड़ा झटका लगा है। इससे येऊर की प्राकृतिक सुंदरता को बनाए रखने में मदद मिलेगी।

दो हफ्ते पहले अदालत ने संजय गांधी राष्ट्रीय उद्यान के अंतर्गत आने वाले येउर में अवैध रूप से बनाए गए सात बंगलों के खिलाफ ठाणे महानगर पालिका की कार्रवाई पर रोक लगाने का आदेश दिया था। इसके बाद ठंडे पड़े अनधिकृत निर्माणों के खिलाफ कार्रवाई में फिर तेजी आ गई है। पिछले कुछ वर्षों में बिना किसी अनुमति के अनधिकृत टर्फ क्लब बनाए गए, जबकि येऊर में अवैध निर्माण, होटल, ढाबे, शादियों और अन्य समारोहों के लिए लॉन पहले से ही स्थापित किए गए थे। यहां क्रिकेट, टेनिस, फुटबॉल जैसे आउटडोर खेल तीव्र विद्युत प्रकाश में खेले जाते थे। यह सवाल सामाजिक कार्यकर्ताओं और पर्यावरण संगठनों की मदद से स्थानीय लोगों द्वारा कई बार उठाया गया था। विधानसभा सत्र में भी इस पर चर्चा हुई, आखिरकार ठामपा प्रशासन ने कार्रवाई का डंडा उठा लिया है। ठाणे महानगर पालिका अंतर्गत वर्तकनगर प्रभाग समिती की हद में आने वाले पांच टर्फक्लब पर कार्यवाई की गई है, उक्त जानकारी वर्तकनगर प्रभाग समिती के सहायक आयुक्त अभिजित खोले द्वारा दी गयी।

बॉम्बे हाई कोर्ट में लंबित जनहित याचिका संख्या 102/2023 रोहित जोशी बनाम ठाणे महानगर पालिका मामले में अगली सुनवाई 11 अक्टूबर को होगी। पिछली सुनवाई के दौरान, ठाणे महानगर पालिका के साथ-साथ पर्यावरण संवेदनशील क्षेत्र नियंत्रण समिति ने वन विभाग और बिजली बोर्ड को येऊर में टर्फक्लब समेत अन्य अनधिकृत निर्माणों के संबंध में स्थिति रिपोर्ट के संबंध में 30 दिनों के भीतर एक हलफनामा प्रस्तुत करने का निर्देश दिया था। हलफनामा जमा करने की अंतिम तिथि समाप्त होने के 15 दिन बीत जाने के बावजूद किसी ने भी इसे जमा नहीं किया है। याचिकाकर्ता और पर्यावरणविद रोहित जोशी का आरोप है कि एक दिन पहले ही महानगर पालिका प्रशासन ने हाई कोर्ट के सामने अपनी पोल न खुल जाए इसलिए आमने-सामने की कार्रवाई की थी।

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