केंद्रीय मंत्री और भाजपा विधायक की खिंचतान के चलते अपने गढ़ में बढ़ा भाजपा का सिरदर्द

केंद्रीय मंत्री और भाजपा विधायक की खिंचतान के चलते अपने गढ़ में बढ़ा भाजपा का सिरदर्द

कपिल पाटिल समर्थक जिला अध्यक्ष मधुकर मोहपे को हटाने के लिए, विधायक किसन कथोरे समर्थकों की शीर्ष नेताओं से मुलाकात

योगेश पाण्डेय – संवाददाता

ठाणे – पिछले कुछ वर्षों में ठाणे जिले के ग्रामीण इलाकों में काफी ताकत बना चुकी भाजपा को फिलहाल केंद्रीय राज्य मंत्री कपिल पाटिल और मुरबाड विधायक किसन कथोरे के बीच सार्वजनिक विवाद का सामना करना पड़ रहा है। भाजपा के ठाणे ग्रामीण अध्यक्ष मधुकर मोहपे की कार्यप्रणाली इन दोनों नेताओं के बीच विवाद का कारण बन गई है और भिवंडी लोकसभा क्षेत्र असुरक्षित नजर आ रहा है, इसलिए पाटिल के समर्थन वाले मोहपे को हटाने के लिए कथोरे के कुछ समर्थकों ने जोरदार शक्ति प्रदर्शन शुरू कर दिया है, जिसके चलते यह लोकसभा सीट भाजपा के लिए चुनौती बनने के संकेत दे रही है।

भिवंडी लोकसभा का प्रतिनिधित्व करने वाले पाटिल के लिए पांच साल पहले का चुनाव आसान नहीं था। लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लहर में कपिल पाटिल ने डेढ़ लाख वोटों के अंतर से जीत हासिल की। हालांकि पाटिल इस बात से खुश हैं कि 2014 की तुलना में वोटों का अंतर बढ़ा है, लेकिन यह जीत उनके लिए उतनी आसान नहीं थी जितनी दिख रही है। मोदी लहर पर सवार होकर लगातार दो बार लोकसभा पहुंचे पाटिल को ऐसे संकेत मिलने लगे हैं कि इस साल के चुनाव में उन्हें अपने घरेलू मोर्चे पर विरोध का सामना करना पड़ेगा। वर्तमान में ठाणे ग्रामीण के भाजपा अध्यक्ष मधुकर मोहपे की कार्यप्रणाली को लेकर पाटिल और कथोरे के बीच सार्वजनिक बहस चल रही है और कथोरे के समर्थकों ने मोहपे को हटाने की मांग को लेकर सीधे प्रदेश अध्यक्ष का दरवाजा खटखटाया है, जिससे गढ़ में कलह की हवा चल रही है। ग्रामीण क्षेत्र भाजपा के लिए खतरे की घंटी बन गया है।

राज्य में अधिक लोकसभा सीटें हासिल करने के लिए भाजपा का विभिन्न स्तरों पर गणित चल रहा है। कभी कांग्रेस का गढ़ रहे इस संसदीय क्षेत्र के कुछ विधानसभा क्षेत्रों में भाजपा ने भी अपनी पकड़ बना ली है। इसलिए विपरीत माहौल में भी मोदी लहर में कपिल पाटिल के लिए यह संसदीय क्षेत्र चुनौती पूर्ण बन गया है। वहीं कथोरे के समर्थकों ने शीर्ष नेताओं से शिकायत की है कि पाटिल ने मुरबाड विधायक किसन कथोरे को लगातार नाराज कर यहां घटाव की राजनीति शुरू कर दी है। केंद्रीय मंत्री पाटिल की आक्रामक राजनीति के कारण ठाणे ग्रामीण जिले में भाजपा के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं में बेचैनी है। फिलहाल मंत्री पाटिल मुरबाड निर्वाचन क्षेत्र के भाजपा विधायक किसन कथोरे को फंसाने का कोई मौका नहीं छोड़ रहे हैं, जो राजनीतिक और प्रशासनिक अनुभव के मामले में मंत्री कपिल पाटिल से वरिष्ठ हैं। इससे कथोरे के समर्थकों में दुविधा की स्थिति पैदा हो गई है।

ग्राम पंचायत से अपना सफर शुरू करने वाले कथोरे उम्र और राजनीतिक अनुभव के मामले में कपिल पाटिल से वरिष्ठ हैं। दोनों की राजनीतिक उत्पत्ति राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी रही है। पाटिल कृषि समुदाय से हैं और कथोर कुनबी समुदाय से हैं। अंबरनाथ क्षेत्र जो पहले मुरबाड, शाहपुर, भिवंडी ग्रामीण, कथोर का गढ़ था, वहां ज्यादातर कुनबी समुदाय का वर्चस्व है। राज्य में चाहे किसी की भी सरकार हो, कथोरे की सरकार की ओर से विकास कार्य कराने में अहम भूमिका रही है। विधायक कथोरे के मुरबाड निर्वाचन क्षेत्र में पाटिल को बड़ा मताधिकार मिला। इस बीच कपिल पाटिल ने मधुकर मोहपे से संपर्क किया, जो पहले पार्टी में बहुत सक्रिय नहीं थे और कभी कथोरे के कट्टर समर्थक थे, और मोहपे के माध्यम से कथोरे का खुलकर समर्थन करने लगे। कल्याणग्रामीण इलाकों में कथोरे ने सीनेटर रवींद्र घोडविंडे का समर्थन करना शुरू कर दिया। इस कृत्य से आहत होकर मोहापे कथोरे से दूर होते चले गये। पाटिल ने मोहपे को भिवंडी लोकसभा क्षेत्र अध्यक्ष, ठाणे जिला ग्रामीण भाजपा अध्यक्ष पद की पेशकश की। इससे पाटिल और कथोरे के बीच दरार बढ़ गई है। मोहपे इस बात का ख्याल रख रहे हैं कि कथोरे की छवि और नाम ग्रामीण इलाकों में भाजपा के होर्डिंग पर न हो। इसलिए भाजपा के व्हाट्सएप ग्रुप से कुछ समर्थकों को बाहर का रास्ता दिखाया जा रहा है। अब तक वर्चुअली चल रही ग्रामीण भाजपा की खींचतान अब वन टू वन हो गई है। इस कार्रवाई से आहत कुछ समर्थकों ने सीधे प्रदेश अध्यक्ष से मिलकर अपनी पीड़ा व्यक्त की है।

ठाणे ग्रामीण जिला भाजपा अध्यक्ष मधुकर मोहपे ने कहा है कि भाजपा के एक पुराने व्हाट्सएप ग्रुप में नीलेश सांबरे के कार्यकर्ता शामिल हैं, जिससे उन्हें ग्रुप चैट के माध्यम से भाजपा की अंदरूनी कार्यप्रणाली की आहाट मिल जाती हैं। इसी के चलते उन्हें ग्रुप से निकालने का काम चल रहा है, न की कथोरे समर्थकों को ग्रुप से बाहर किया जा रहा है।

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