वकीलों पर पैसा खर्च करने की बजाय दुकान के साइन बोर्ड मराठी में बनाएं – सुप्रीम कोर्ट 

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वकीलों पर पैसा खर्च करने की बजाय दुकान के साइन बोर्ड मराठी में बनाएं – सुप्रीम कोर्ट 

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद मुंबई महानगर पालिका की कार्यवाई तेज। मराठी बोर्ड नहीं लगाने वाले 5 हजार, दुकानों और प्रतिष्ठानों को भेजा नोटिस 

योगेश पाण्डेय – संवाददाता 

मुंबई – वकीलों पर पैसा खर्च करने की बजाय दुकान के साइन बोर्ड मराठी में बनाएं, सुप्रीम कोर्ट द्वारा ट्रेड एसोसिएशन को फटकार लगाने से उम्मीद जगी है कि निकट भविष्य में मुंबई में अन्य भाषाओं में लगे दुकानों और संस्थानों के साइन बोर्ड के खिलाफ कार्रवाई तेज होगी। कोर्ट का फैसला मुंबई महानगर पालिका के पक्ष में आया तो प्रशासन ने कार्रवाई की तैयारी कर ली है। इस बीच अदालत ने पिछले साल नवंबर में कार्यवाही पर रोक लगा दी। इससे पहले 27 हजार दुकानों का निरीक्षण किया गया था और इनमें से करीब 22 हजार दुकानों में मराठी प्लेटें लगायी जा चुकी थीं। जबकि बोल्ड मराठी में बोर्ड नहीं लगाने वाले पांच हजार दुकानों को कानूनी कार्रवाई के लिए नोटिस भेजे गए हैं।

महाराष्ट्र दुकानें और प्रतिष्ठान (रोजगार और सेवा की शर्तों का विनियमन) संशोधन अधिनियम, 2022 की धारा 36 ‘सी’ (1) की धारा 6 के तहत पंजीकृत प्रत्येक दुकान-प्रतिष्ठान को धारा 7 के तहत मराठी में मोटे अक्षरों में नेमप्लेट लगाना आवश्यक है।मुंबई महानगर पालिका ने पिछले वर्ष इस संबंध में कार्रवाई अभियान शुरू किया था। हालाँकि अभियान को महानगर पालिका द्वारा चार बार बढ़ाया गया क्योंकि व्यापारी संघों ने विभिन्न कारणों का हवाला देते हुए विस्तार का अनुरोध किया था। मामला हाई कोर्ट से सुप्रीम कोर्ट में जाने के बाद नवंबर 2022 में कोर्ट ने कार्यवाही पर रोक लगा दी।

इस बीच सुप्रीम कोर्ट में इस मामले की सुनवाई शुरू हो गई, शुक्रवार को हुई सुनवाई में कोर्ट ने याचिकाकर्ता फेडरेशन ऑफ रिटेलर्स ट्रेडर्स वेलफेयर एसोसिएशन से कहा कि मराठी महाराष्ट्र की आधिकारिक भाषा है और अमराठी बोर्ड के खिलाफ कार्रवाई से बचने के लिए वकीलों पर पैसा खर्च करने के बजाय, दुकानों के बोर्ड मराठी में बनाएं। कोर्ट ने इस मामले में फेडरेशन को जवाब देने के लिए तीन हफ्ते का समय दिया है और फिर आगे की सुनवाई तय करने का फैसला किया है। पिछले साल कोर्ट ने कार्रवाई पर रोक लगा दी थी, जबकि महानगर पालिका ने मराठी बोर्ड लगाने के लिए 30 सितंबर 2022 की चौथी और आखिरी डेडलाइन दी थी। इसके बाद 10 अक्टूबर से अगले एक महीने तक सभी 24 वार्डों में ऑपरेशन चलता रहा।

मुंबई में करीब पांच लाख दुकानें हैं और अनुमान है कि इनमें से दो लाख दुकानों पर लगे साइनबोर्ड मराठी में नहीं हैं। अक्टूबर 2022 में महानगर पालिका ने 27 हजार दुकानों का निरीक्षण किया और पाया गया कि करीब 22 हजार दुकानों पर मराठी बोर्ड लागु किया गया है, तो वहीं 5000 दुकानों ने मराठी बोर्ड लगाए, लेकिन सामने आया कि ये नियमों के मुताबिक नहीं लगाए गए थे। यानी मराठी, हिंदी और अंग्रेजी में आधे-अधूरे अक्षरों वाले बोर्ड लगाए गए हैं। नियमों के मुताबिक साइनबोर्ड प्रमुखता से मराठी में होना अनिवार्य है, महानगर पालिका ने ऐसी दुकानों को कार्रवाई का नोटिस भेजा है।

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