शिंदे गुट और भाजपा के विरोध के बावजूद अजीत पवार बने वित्त मंत्री

शिंदे गुट और भाजपा के विरोध के बावजूद अजीत पवार बने वित्त मंत्र

राकांपा के सभी 9 विधायकों को मंत्रालयों का बंटवारा। शिंदे गुट और भाजपा विधायकों में नाराजगी 

योगेश पाण्डेय – संवाददाता 

मुंबई – राकांपा से बगावत कर कुछ विधायकों को लेकर एनडीए सरकार को समर्थन देने वाले उपमुख्यमंत्री अजित पवार की टीम को विभागों का कार्यभार सौंप दिया गया है। अजित पवार को उनकी मांग के अनुसार वित्त और योजना विभाग मिल गया है। इसके अलावा वरिष्ठ नेता छगन भुजबल को खाद्य आपूर्ति, धर्मराव बाबा अत्राम को ड्रग एन्ड एडमिनिस्ट्रेशन विभाग दिया गया है। जबकि सहकारिता विभाग अजित पवार के करीबी दिलीप वलसे पाटिल को मिला है।

धनंजय मुंडे को कृषि मंत्रालय और हसन मुश्रीफ को मेडिकल शिक्षा विभाग का मंत्रीपद दिया गया है। अनिल पाटिल के खाते में आपदा प्रबंधन और पुनर्विकास विभाग आ गया है। अदिति तटकरे को महिला एवं बाल विकास मंत्री तो संजय बनसोडे को खेल एवं युवा मामले के मंत्रालय का कार्यभार दिया गया है। मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के ओएसडी ने राज्यपाल रमेश बैंस से मुलाक़ात कर मंत्रियों को दिए गये विभागों की सूची सौंपी थी।

सबसे खास बात यह है कि अजित पवार को वित्त मंत्रालय दिया गया है जिसकी मांग वे पहले दिन से ही कर रहे थे, जबकि मुख्यमंत्री खुद उन्हें यह मंत्रालय देने का विरोध कर रहे थे। अजित पवार ने कहा कि हम सरकार का हिस्सा हैं और जो भी मंत्रालय दिया जायेगा हम उसे सहर्ष स्वीकार करेंगे। हमारी ऐसी कोई खास मांग नहीं है कि हमें कोई स्पेसिफीक मंत्रालय ही मिलना चाहिए।

अजित पवार समेत राकांपा के 9 विधायकों ने 9 जुलाई को मन्त्रीपद की सपथ ली थी। इस घटनाक्रम के चलते महाराष्ट्र की सियासत में ठीक एक साल बाद फिर से भूचाल आ गया था। इससे पहलें एकनाथ शिंदे ने शिवसेना से बगावत कर साल 2022 में 40 विधायकों के साथ भाजपा के समर्थन से सत्ता हथिया ली थी। फिलहाल अब यह चर्चा का विषय बना हुआ है कि शिंदे गुट के विधायकों को जो पिछले एकसाल से मंत्रिपद की आस लगाए बैठे हैं उनका क्या होगा। अहम जानकारी यह है कि शिवसेना और भाजपा के मंत्रियों के विभाग बदलने पर विचार चल रहा है।

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