संवरते रिश्तों में जेल यात्रा की भड़ास, मुखपत्र सामना के जरिये भाजपा और जांच एजेंसियों पर साधा निशाना

संवरते रिश्तों में जेल यात्रा की भड़ास, मुखपत्र सामना के जरिये भाजपा और जांच एजेंसियों पर साधा निशाना

भाजपा नेताओं समेत धन कुबेर तक पर आपराधिक मामले, फिर भी केवल विपक्ष पर जांच एजेंसियों की नजर

योगेश पाण्डेय – संवाददाता 

मुंबई – शिवसेना उद्धव बालासाहेब ठाकरे के नेता और राजयसभा सांसद संजय राउत की जेल से रिहाई के बाद एक बार फिर से महाराष्ट्र की राजनीती आरोप प्रत्यारोप के सिलसिलो से गरमा गई है। संजय राउत ने गुरुवार को एक बयान देते हुए कहा था कि वह किसी की आलोचना नहीं करेंगे और वह नहीं मानते कि उनके खिलाफ किसी प्रकार की साजिश की गई है। इसके अलावा उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह से मुलाकात करने की भी बात कही थी। यहां तक कि देवेंद्र फडणवीस के फैसलों को भी सराहा था, इससे यह कयास लग रहे थे कि क्या संजय राउत और शिवसेना के तेवर बदल गए हैं। लेकिन अब एक बार फिर से शिवसेना ने अपना रुख बदल लिया है।शिवसेना के मुखपत्र सामना में भाजपा पर तीखा हमला बोला गया है, जिसके संपादक खुद संजय राउत ही हैं।

सामना’ में पहले पन्ने पर केंद्र सरकार और जांच एजेंसियों की तीखी आलोचना की गई है। शिवसेना के अखबार ने लिखा है कि देश में कानून का राज नहीं है। न्यायपालिका दबाव में है और केंद्रीय एजेंसियां गुलाम हो गई हैं। संजय राउत मामले में यह बात सामने आई है। सामना में एजेंसियों की आलोचना करते हुए भाजपा नेताओं पर गंभीर आरोप भी लगाए गए हैं। सामना में कहा गया है कि महाराष्ट्र भाजपा के कम से कम 7 मंत्री, 15 विधायक और कई सांसदों समेत पार्टी को धन मुहैया कराने वाले बिल्डरों के नाम कई अपराध दर्ज हैं। इनके खिलाफ जांच हो तो ये सभी जेल जा सकते हैं, लेकिन अदालत ने खुद ही कहा है कि ‘ईडी’ खुद आरोपियों का चयन करती है।

महाराष्ट्र में शिवसेना को बुलाने और सरकार गिराने के लिए ‘ईडी’ का इस्तेमाल किया गया था। जिन लोगों को ‘ईडी’ पहले गिरफ्तार करने जा रहा था, उन्हें शिवसेना छोड़ते ही क्लीन चिट दे दी गई। जो शिंदे-फडणवीस के आगे नहीं झुके, वे ‘ईडी-सीबीआई’ के अपराधी बन गए। देश में कानून का राज नहीं है। न्यायिक प्रणाली दबाव में है और केंद्रीय व्यवस्था गुलाम हो गई है। संजय राउत की तरह राकांपा नेता और राज्य के पूर्व गृह मंत्री अनिल देशमुख भी राजनीतिक साजिश के तहत जेल में बंद हैं। महाराष्ट्र में ‘ईडी’ के कई मामले इस बात की गवाही देते हैं।

अखबार ने लिखा कि राज्य के पूर्व गृह मंत्री अनिल देशमुख और उनके सहयोगी एक साल से अधिक समय से जेल में हैं। यह सब राजनीतिक साजिश के तहत किया जा रहा है। क्या राज्य के गृह मंत्री आपराधिक प्रकृति के पुलिस अधिकारियों को मुंबई-ठाणे में बार मालिकों से 100 करोड़ रुपये वसूलने का निर्देश दे सकते हैं? लेकिन ईडी और सीबीआई ने खुद अधिकारी की गवाही के आधार पर देशमुख के खिलाफ मामला तय किया, जो मुकेश अंबानी के घर के सामने विस्फोटक रखने की साजिश में आरोपी है। जिसने मामले में सबूत नष्ट करने के लिए अपने दोस्त तक की हत्या कर दी थी।

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