मनपा कर्मचारियों और संगठनों में सरकार द्वारा जारी बोनस को लेकर नाराजगी

मनपा कर्मचारियों और संगठनों में सरकार द्वारा जारी बोनस को लेकर नाराजगी

बोनस राशि से कुल वार्षिक आय का इनकम टैक्स काटने पर भड़की दि म्युनिसिपल यूनियन

योगेश पाण्डेय – संवाददाता 

मुंबई : इस साल बेस्ट इनिशिएटिव लेते हुए राज्य सरकार द्वारा मुंबई महानगर पालिका के अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए 22 हजार 500 रुपये के दिवाली बोनस की घोषणा की गई। मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के इस ऐलान से महानगर पालिका के श्रेष्ठ अधिकारियों व कर्मचारियों की दिवाली और भी मीठी हो गई। वहीं, एक बड़ी मांग है कि अधिकारियों और कर्मचारियों को घोषित बोनस की राशि को बिना आयकर की कटौती के कुल वार्षिक आय में शामिल किया जाए। हालांकि, बोनस राशि से आयकर काटने के खिलाफ कर्मचारियों और कर्मचारी संगठनों ने नाराजगी जताई है।

मुंबई महानगर पालिका द्वारा दिवाली के दौरान बोनस की घोषणा की जाती रही है। पिछले साल बोनस राशि 20 हजार तक थी, जो इस साल बढ़कर 22,500 रुपये हो गई। इससे महानगर पालिका व बेस्ट के सभी अधिकारी व कर्मचारी लाभान्वित हुए हैं। जैसे ही यह बोनस राशि घोषित की जाती है, इसका एक निश्चित प्रतिशत आयकर नियमों के अनुसार आयकर के रूप में काट लिया जाता है। इसलिए, घोषित बोनस राशि और वास्तव में प्राप्त राशि में काफी अंतर देखने को मिलता है। इसलिए लगातार यह मांग की जाती रही है कि बोनस से आयकर की राशि नहीं काटी जाए। हालांकि, वरिष्ठ अधिकारी बताते हैं कि नियमानुसार राशि की कटौती करना अनिवार्य है।

इस पृष्ठभूमि में कर्मचारियों का यह भी कहना है कि महानगर पालिका को बोनस राशि में से एक साथ आयकर की राशि की कटौती नहीं करनी चाहिए। इसके बजाय, यह बार-बार सुझाव दिया गया है कि वार्षिक आय से आयकर कटौती के सूत्र में बोनस राशि को माना जाना चाहिए। महानगर पालिका की वार्षिक आय से आयकर की कटौती करते हुए श्रेष्ठ अधिकारी-कर्मचारी बताते हैं कि बोनस की राशि को कुल आय में जोड़ा जाए तो यह अधिक उपयोगी है। अगर बोनस की रकम में से ही इनकम टैक्स की कटौती की जाए तो इसका असर दिवाली की खुशियों पर पड़ेगा। इसके बजाए, अगर इसे कुल वार्षिक आय में जोड़ा जाता है, तो कुल आयकर राशि सामान्य हो जाएगी और कर्मचारियों पर बोझ भी नहीं पड़ेगा।

मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने 29 सितंबर को सह्याद्री गेस्ट हाउस में बोनस को लेकर हुई बैठक में बोनस राशि की घोषणा की थी, उस समय शिंदे ने आदेश दिया था कि हर महीने इस राशि से आयकर नहीं काटा जाए। हालांकि, 21 अक्टूबर को बोनस राशि प्राप्त करते समय इस बात पर नाराजगी है कि आयकर की राशि को राशि से डायवर्ट किया गया है। दि म्युनिसिपल यूनियन ने महानगर पालिका की कार्रवाई की कड़ी निंदा की है। साथ ही मुख्य सचिव रमाकांत बाने ने मांग की है कि पत्र भेजकर मुख्यमंत्री शिंदे की अवज्ञा करने पर महानगर पालिका प्रशासन पर दंडात्मक कार्रवाई की जाए।

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