वनवास की तरह चौदह साल बाद हुआ उत्तर भारतीयों का मोहभंग

वनवास की तरह चौदह साल बाद हुआ उत्तर भारतीयों का मोहभंग

200 उत्तर भारतीय मनसे में हुए शामिल

समाज में लगाईं जा रही हैं तरह-तरह की अटकलें

विशेष संवाददाता

कल्याण- वनवास की तरह चौदह साल बाद उत्तर भारतीयों का भी मोहभंग हुआ है। शुक्रवार को डोंबिवली और कल्याण ग्रामीण में करीब 200 उत्तर भारतीय मनसे में शामिल हुए जिसको लेकर तरह-तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं। महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना का पूंछ पकड़कर राजनीतिक वैतरणी पार करने वाले उत्तर भारतीय नेता शायद ये भूल गए कि साल 2008 में मनसे के कार्यकर्ताओं ने कल्याण और डोंबिवली में तांडव मचाया था। इस खूनी खेल में पिसवली के रहने वाले दो डॉक्टर भाइयों की जान चली गई। मनसे के तथाकथित गुंडों ने पुलिस की जीप से खींचकर डा.ओमप्रकाश दुबे और डा.मयूर दुबे जैसे निर्दोष डॉक्टरों की निर्मम हत्या की। इस हत्याकांड का विरोध करने की बजाय मनसे प्रमुख राज ठाकरे ने राजनीतिक हवा दी जिससे माहौल और बिगड़ गया। राज ठाकरे चाहते थे कि उनके एक इशारे पर मुंबई की रफ्तार थम जाय। हुआ भी ऐसा ही। राज की गिरफ्तारी के बाद एमएनएस कार्यकर्ता उग्र हो गए और उत्तर भारतीयों के साथ खूनी खेल खेलना शुरू कर दिए। टाटा पावर हाउस के पास पिसवली गांव में खूनी झड़प हुई और उस हिंसा में तीन लोग शिकार हो गए। राज ठाकरे की गिरफ्तारी के बाद हिंसा थमने का नाम नहीं ले रहा था। रात को और भी कई जगहों पर हिंसा हुई। कई पुलिस वाले जख्मी हुए। राज की गिरफ्तारी के बाद मुंबई में जो कुछ हुआ उससे आम आदमी दहशत में था। राज के गुंडों ने मुंबई को हाईजैक करके रखा था। दुकानें बंद थी। लोग घरों से बाहर निकलने में डरते थे। कई वाहनों को आग के हवाले कर दिया गया। राज का गुंडाराज फन उठाए खड़ा था और दहशत के मारे आम आदमी कांप रहा था। सड़कों पर तांडव कर रहे महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के गुंडों ने मीडिया को भी नहीं बख्शा। आईबीएन 7 की टीम को निशाना बनाया। ओबी बैन तोड़ दी गई, और कैमरामैन सचिन पेंडनेकर को बेरहमी से पीटा गया। यही कारण है कि उत्तर भारतीय समाज मनसे से दूर होता चला गया। इतना ही नहीं गुंडे और मवालियों की वहज से पार्टी का भी पतन हुआ और उस दौर के दर्जनों विधायकों का आंकड़ा आज एक पर आकर सिमट गया है। इतना कुछ होने के बाद भी यदि उत्तर भारतीय मनसे का दामन पकड़कर राजनीतिक विरासत बनाने में लगे हैं तो यह उनकी भूल है कारण देर सवेर कभी ना कभी उन्हें भी यह दंश झेलना पड़ सकता है?

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