मराठी बोर्ड लगाने के 90 दिन की मियाद ख़त्म, जुर्माना लगाने को लेकर असमंजस में प्रसाशन

मराठी बोर्ड लगाने के 90 दिन की मियाद ख़त्म, जुर्माना लगाने को लेकर असमंजस में प्रसाशन

अब तक केवल 48 फीसदी दुकानों के बदले गए बोर्ड, रिटेल ट्रेडर्स की सुप्रीम कोर्ट में याचिका 

योगेश पाण्डेय – संवाददाता 

मुंबई : मुंबई समेत आसपास के इलाकों में दुकानों की नेमप्लेट मराठी भाषा में लगाने के फैसले को लागू करने की समय सीमा शुक्रवार को खत्म ही गई है, और जिन व्यावसायिक प्रतिष्ठानों ने नेमप्लेट नहीं बदली है उनके खिलाफ कार्रवाई को लेकर अभी भी अनिश्चितता बनी हुई है। ऐसे संकेत हैं कि आयुक्त की मंजूरी या इस संबंध में सरकार के नए फैसले के बाद दुकानों पर मराठी बोर्ड की समस्या का समाधान किया जायेगा।

मार्च महीने में राज्य सरकार ने सभी दुकानों और प्रतिष्ठानों पर मराठी बोर्ड को बोल्ड शब्दों के साथ लगाना अनिवार्य करने का हुक्म जारी किया था। लेकिन मुंबई में महानगर पालिका द्वारा इस फैसले को पुरजोर लागू नहीं कर पा रही है। मुंबई महानगर पालिका के दुकान एवं स्थापना विभाग ने बड़े अक्षरों में मराठी बोर्ड नहीं लगाने वाली दुकानों के खिलाफ कार्रवाई की योजना तैयार की है। मुंबई महानगर पालिका अधिकारियों ने बताया कि आयुक्त की मंजूरी के बाद ही कार्रवाई की जाएगी।

राज्य सरकार के इस आदेश के बाद फेडरेशन ऑफ रिटेल ट्रेडर्स’ की ओर से बॉम्बे हाईकोर्ट में मराठी बोर्डों की मजबूरी को चुनौती देने वाली याचिका दायर की गई थी, हालांकि हाईकोर्ट ने इस याचिका को खारिज कर दिया था। संगठन ने तब छह महीने के विस्तार की मांग की थी, लेकिन महानगर पालिका ने केवल 3 महीने क़ी ही बढ़ोत्तरी क़ी थी जो अब समाप्त हो गया है। लेकिन अब दुकानदार संघ ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। संगठन ने राय व्यक्त की है कि सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने तक कार्रवाई रोक दी जानी चाहिए। दुकानदारों ने इस स्टैंड के साथ सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है कि मराठी बोर्ड और एक विशिष्ट आकार के अक्षरों को जबरदस्ती नहीं बनाया जाना चाहिए, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर विचार किया जाना चाहिए।

व्यापारियों की मांग को लेकर महानगर पालिका ने अब तक चार बार मराठी बोर्ड लगाने की समयसीमा बढ़ा दी है। चौथी बार दिया गया कार्यकाल अब समाप्त हो गया है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या महानगर पालिका उन दुकानों के खिलाफ कार्रवाई करेगी जो मराठी बोर्ड नहीं लगाने या राज्य सरकार के फैसले का इंतजार कर रहे हैं।

मुंबई की पांच लाख दुकानों में से 48 फीसदी दुकानों पर ही अभी तक मराठी बोर्ड लगे हैं। कार्रवाई की गई तो मुख्य सड़कों की दुकानों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया जाएगा। उसके बाद प्रति प्रतिष्ठान 2 हजार रुपये का जुर्माना वसूला जाएगा।

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