टेरर फंडिंग मामले में PFI समेत अन्य 8 संगठनों पर 5 साल का बैन

टेरर फंडिंग मामले में PFI समेत अन्य 8 संगठनों पर 5 साल का बैन

देश कि सुरक्षा और अखंडता का हवाला देते हुए केंद्र सरकार का बड़ा फैसला। टेरर लिंक का भी खुलासा

योगेश पाण्डेय – संवाददाता 

मुंबई – केंद्र सरकार ने बुधवार सुबह पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया यानी PFI को 5 साल के लिए बैन कर दिया। PFI के अलावा 8 और संगठनों पर कार्रवाई की गई है। गृह मंत्रालय ने इन संगठनों को बैन करने का नोटिफिकेशन जारी किया है। इन सभी के खिलाफ टेरर लिंक के सबूत मिले हैं। केंद्र सरकार ने यह एक्शन अनलॉफुल एक्टिविटी प्रिवेंशन एक्ट UAPA के तहत लिया है। सरकार ने कहा, PFI और उससे जुड़े संगठनों की गतिविधियां देश की सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा हैं।

सरकार ने पीएफआई के अलावा रिहैब इंडिया फाउंडेशन, कैंपस फ्रंट ऑफ इंडिया,ऑल इंडिया इमाम काउंसिल, नेशनल कॉन्फेडरेशन ऑफ ह्यूमन राइट्स ऑर्गनाइजेशन, नेशनल विमेन्स फ्रंट,जूनियर फ्रंट, एम्पावर इंडिया फाउंडेशन और रिहैब फाउंडेशन जैसे संगठनों पर भी बैन लगा दिया है।

बैन लगाए जाने के मुख्य कारणों का विवरण प्रस्तुत करते हुए सरकार ने बताया कि PFI और इससे जुड़े संगठन गैरकानूनी गतिविधियों को अंजाम दे रहे थे। ये गतिविधियां देश की सुरक्षा और अखंडता के लिए खतरा हैं।इन संगठनों की गतिविधियां देश की शांति और धार्मिक सद्भाव के लिए खतरा बन सकती हैं।

PFI और इससे जुड़े संगठन देश में आतंकवाद का समर्थन कर रहे हैं।

केंद्र सरकार UAPA के तहत 5 साल का प्रतिबंध लगा रही है। ये कदम एजेंसियों की जांच के बाद उठाया जा रहा है। एजेंसियों का कहना है कि PFI के कुछ फाउंडिंग मेंबर्स SIMI के लीडर्स थे। इसके संबंध बांग्लादेश के आतंकी संगठन जमात-उल-मुजाहिदीन से भी जुड़े हुए थे। ये दोनों प्रतिबंधित संगठन हैं। साथ ही ऐसी कई घटनाएं हैं, जिनसे ये साफ होता है कि PFI के संबंध ISIS से हैं। PFI के कुछ सदस्यों ने इंटरनेशनल ऑर्गनाइजेशन जॉइन किए। ये संगठन चुपके-चुपके देश के एक तबके में यह भावना जगा रहा था कि देश में असुरक्षा है और इसके जरिए वो कट्टरपंथ को बढ़ावा दे रहा था।

क्रिमिनल और टेरर केसेस से जाहिर है कि इस संगठन ने देश की संवैधानिक शक्ति के प्रति असम्मान दिखाया है। बाहर से मिल रही फंडिंग और वैचारिक समर्थन के चलते यह देश की आतंरिक सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा बन गया है। PFI ने अपने सहयोगी और फ्रंट बनाए, इसका मकसद समाज में युवाओं, छात्रों, महिलाओं, इमामों, वकीलों और कमजोर वर्गों के बीच पैठ बढ़ाना था। इस पैठ बढ़ाने के पीछे PFI का एकमात्र लक्ष्य अपनी मेंबरशिप, प्रभाव और फंड जुटाने की क्षमता को बढ़ाना था।

NIA, ED और राज्यों की पुलिस ने 22 और 27 सितंबर को PFIऔर उससे जुड़े संगठनों पर ताबड़तोड़ छापेमारी की थी। पहले राउंड की छापेमारी में 106 PFI से जुड़े लोग और कार्यकर्ता गिरफ्तार हुए थे। 27 सितंबर को दूसरे राउंड की छापेमारी में 250 PFI से जुड़े लोग गिरफ्तार/हिरासत में लिए गए। जांच एजेंसियों को PFI के खिलाफ पर्याप्त सबूत मिले। इसके बाद यह कार्रवाई की गई।​​​​

साल 2006 में मनिथा नीति पसाराई और नेशनल डेवलपमेंट फंड नदफ नामक संगठन ने मिलकर पॉपुलर फ्रंट इंडिया (PFI) का गठन किया था। ये संगठन शुरुआत में दक्षिण भारत के राज्यों में ही सक्रिय था, लेकिन अब UP-बिहार समेत 23 राज्यों में फैल चुका है।

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