उद्धव गुट और शिंदे गुट में जुबानी जंग। मातोश्री के कुत्ता घुमाने वाले कर्मचारियों को भी अपने गुट में शामिल करें मुख्यमंत्री

उद्धव गुट और शिंदे गुट में जुबानी जंग। मातोश्री के कुत्ता घुमाने वाले कर्मचारियों को भी अपने गुट में शामिल करें मुख्यमंत्री

नवरात्री जुलुस के राजनितिकरण पर भड़के सांसद राजन विचारे। थापा और राजे को शिंदे गुट में शामिल करने पर गर्मायी राजनीती

योगेश पाण्डेय – संवाददाता 

मुंबई – बालासाहेब ठाकरे के करीबियों और मातोश्री के विश्वस्त चंपा सिंह थापा और मोरेश्वर राजे के एकनाथ शिंदे गुट में चले जाने पर मातोश्री की ओर से प्रतिक्रिया सामने आई है। उद्धव गुट ने टिप्पणी करते हुए कहा है है कि मातोश्री के कई और भी कर्मचारी, सफाईकर्मियों और कुत्तों को घुमाने वालों के किसी पार्टी के साथ शामिल होने से हमें कोई फर्क नहीं पड़ने वाला है।

उद्धव ठाकरे गुट के नेता और ठाणे से सांसद राजन विचारे ने शिंदे गुट में बालासाहेब के सहायकों के शामिल होने की निंदा की। उन्होंने ठाणे में प्रेस कांफ्रेंस करते हुए कहा कि शहर में सर्वदलीय नवरात्रि समारोह लोगों की राजनीतिक घोषणाओं से प्रभावित हैं। देवी के जुलूस के बीच कुछ लोग अपने गुट को बड़ा करने में जुटे हुए हैं।

दरअसल मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने सोमवार को टेम्भी नाका नवरात्रि जुलूस का नेतृत्व करते हुए कलवा से टेम्बी नाका तक पैदल यात्रा को पूरा किया। टेम्भी नाका में शिंदे ने थापा और राजे सहित पार्टी में कुछ नए लोगों को शामिल करने की घोषणा की, जो दिवंगत बालासाहेब ठाकरे के करीबी माने जाते थे।

ठाकरे गुट के प्रवक्ता चिंतामणि कारखानिस ने कहा टेम्भी नाका में नवरात्रि समारोह में सभी दलों की भागीदारी देखी गई थी, पहले कभी भी समारोहों का राजनीतिकरण नहीं किया गया है। इससे उलट सोमवार को मुख्यमंत्री ने देवी मां के इस समारोह को अपने राजनीतिक एजेंडे के मंच के रूप में इस्तेमाल किया। उन्होंने थापा और राजे को भी शामिल करने की घोषणा की। दोनों बालासाहेब के पूर्व सहायक थे लेकिन, मातोश्री में शिवसेना पार्टी में उनका कोई स्थान नहीं हैं। ऐसा करके मुख्यमंत्री क्या हासिल करना चाहते हैं।

उन्होंने आगे कहा कि ऐसे कई लोग हैं जिन्होंने दिवंगत बाळासाहेब ठाकरे के साथ सहायक के रूप में काम किया और अभी भी मातोश्री में हैं।राजे को खुद बालासाहेब ने हटा दिया था, जबकि थापा बालासाहेब के निधन के बाद नेपाल रवाना हो गए थे। ऐसे और भी कई कर्मचारी हैं। रसोइया, सफाईकर्मी, डॉग वॉकर और सुरक्षा गार्ड। क्या मुख्यमंत्री का गुट उन सभी को एक-एक करके अपने पार्टी में बुलाएगा ? मुख्यमंत्री उन्हें अपने कार्यालय या घर पर पार्टी में आमंत्रित कर सकते थे, नवरात्रि के जुलूसों के बीच में ऐसा करना उत्सव को कलंकित करना है। मुख्यमंत्री के पास इस स्तर की राजनीति करने के बजाय राज्य में निपटने के लिए अधिक महत्वपूर्ण मुद्दे हैं।

चिंतामणि ने कहा कि उनका ध्यान अब ठाणे में पार्टी के पुनर्निर्माण पर है और कुछ जो पहले उनसे जुड़ने से डरते थे, अब धीरे-धीरे मूल शिवसेना में वापस आ रहे हैं।

ठाणे के पूर्व महापौर और शिंदे गुट के समर्थक नरेश म्हस्के ने जवाबी टिप्पणी करते हुए कहा मुख्यमंत्री पर टिप्पणी करने वाले चिंतामणि कौन हैं? उन्होंने वार्ड स्तर का चुनाव भी नहीं जीता है और ठाणे के लोगों के बीच उनकी कोई पहचान भी नहीं है। अगर उन्हें मातोश्री से इतना प्यार है तो इतने सालों में ये लोग कहां थे? टेम्भी नाका समारोह की शुरुआत दीघे साहब ने की थी जो एक शिव सैनिक थे और उत्सव हमेशा शिवसेना के ही होते थे। यह हमारे हिंदुत्व आंदोलन का उत्सव है, वर्षों से शिंदे ने समारोह को संभाला है और वह ऐसा करना जारी रखेंगे।

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