राजस्थान की राजनितिक आपदा में, भाजपा को दिख रहा अवसर

राजस्थान की राजनितिक आपदा में, भाजपा को दिख रहा अवसर

गहलोत और पायलट की गुटबाजी के मद्देनजर राजनितिक पहलुओं पर नजर गड़ाए बैठी है भाजपा। तय समय या मध्यावधी चुनाव की पूरी तैयारी

योगेश पाण्डेय – संवाददाता 

मुंबई – राजस्थान में सत्ताधारी दल कांग्रेस के भीतर उपजी गुटबाजी क़ी आपदा में भारतीय जनता पार्टी को अपने लिए बेहतर विकल्प नजर आने लगा है। अशोक गहलोत मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बरकरार रहेंगे या सचिन पायलट उनकी जगह मुख्यमंत्री क़ी कुर्सी संभालेंगे, इसको लेकर अनिश्चितता से उत्पन्न असमंजस क़ी स्थिति पर भाजपा बारीकी से नजर गड़ाए हुए है। अशोक गहलोत की जगह सचिन पायलट को दिए जाने की अटकलों के चलते गुटबाजी को लेकर कांग्रेस सरकार की स्थिरता पर खतरे के बादल मंडरा रहे हैं। हालांकि भाजपा के एक वरिष्ठ नेता ने बताया कि हमारी पार्टी इस घटनाक्रम में शामिल नहीं होने जा रही है, साथ ही कांग्रेस में फुट की स्थिति में भी सरकार बनाने की कोशिश नहीं करेगी।

भाजपा के विश्वसनीय सूत्रों ने बताया कि 2023 में होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए पार्टी बिलकुल तैयार है, लेकिन यदि ऐसी स्थिति उत्पन्न होती है, तो हम माध्यवाधि चुनाव के लिए भी तैयार हैं। पार्टी हमेसा चुनाव के लिए तैयार रहती है। हम बूथ स्तर पर पार्टी की मौजूदगी को मजबूत करने पर फोकस कर रहे हैं और जो भी परिस्थिति बनती है उसके मुताबिक फैसला करेंगे।

2020 में जब अशोक गहलोत के खिलाफ पायलट की अगुआई में विधायकों के एक दल ने बागवत की थी तो इसके लिए भाजपा पर आरोप लगाए गए। हालांकि इस गुट का दावा था कि वह शासन के मुद्दे पर सरकार का ध्यान खींचना चाहते थे, गहलोत ने आरोप लगाया कि पायलट समेत 19 विधायक भाजपा में जाने की धमकी दे रहे थे। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि भाजपा इस गुट के संपर्क में थी। हालांकि भाजपा और पायलट कैंप ने इसका खंडन किया था। बाद में पायलट और उनके समर्थक विधायक वापस लौट आए थे।

राजस्थान में विधानसभा चुनाव बेहद नजदीक है और ऐसे में भाजपा, कांग्रेस में फुट डालने का ठीकरा अपने सर पर नहीं फुटने देना चाहती है। भाजपा आगामी चुनावों में केवल गहलोत के शासन की खामियों को चुनावी मुद्दा बनाना चाहती है। भाजपा नेता ने कहा कि हमें चुनाव में जीत का पूरा भरोसा है क्योंकि दलितों के खिलाफ अत्याचार, भ्रष्टाचार, महिलाओं के खिलाफ अपराध और नफरती वारदातों में बहुत इजाफा हुआ है। राजस्थान के लोग भाजपा को सत्ता में वापस लाने के लिए तैयार हैं। वह यह भी ध्यान दिलाते हैं कि पिछले तीन दशक में राज्य के मतदाताओं ने किसी सरकार को रिपीट नहीं किया है।

स्थिति और बिगड़ने पर राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाए जाने की अटकलों पर पदाधिकारी ने कहा कि इस पर कुछ भी कहना अभी जल्दबाजी होगा। भाजपा ने पहले ही चुनाव की तैयारियां शुरू कर दी हैं। कई राष्ट्रीय नेताओं ने दौरे शुरू कर दिए हैं और कार्यकर्ताओं में जोश भरने का काम किया जा रहा है। 2018 में भाजपा ने 200 सीटों वाली विधानसभा में 73 सीटों पर जीत हासिल की थी। कांग्रेस 100 सीटों पर विजयी हुई थी।

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