क्या कांग्रेस के भारत जोड़ने से पहले ही टूट जायेगा राजस्थान ?

क्या कांग्रेस के भारत जोड़ने से पहले ही टूट जायेगा राजस्थान ?

सचिन पायलट को रोकने गहलोत समेत 82 विधायकों के इस्तिफे से बिगड़ा समीकरण। गहलोत या पायलट में उलझी कांग्रेस

योगेश पाण्डेय – संवाददाता 

मुंबई – राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत कांग्रेस अध्यक्ष का चुनाव लड़ने की तैयारी में हैं और हाईकमान ने उन पर भरोसा भी जताया था, लेकिन उनका मुख्यमंत्री पद का मोह पार्टी और गांधी परिवार के लिए संकट खड़ा करता दिखाई पड़ रहा है। शनिवार तक अशोक गहलोत कह रहे थे कि हाईकमान जिसे चाहेगा, वही राजस्थान का अगला मुख्यमंत्री बनेगा। लेकिन रविवार की रात अचानक उन्होंने अपने समर्थक 82 विधायकों का इस्तीफा दिलाकर नया दांव चल दिया। इन विधायकों का कहना है कि गहलोत के विकल्प के रूप में वह सचिन पायलट को स्वीकार नहीं करेंगे। अब कांग्रेस हाईकमान मुश्किल में दिख रहा है और उसके लिए इससे पार पाना सियासी परीक्षा को पास करने जैसा ही होगा।

फिलहाल कांग्रेस हाईकमान सोनिया गाँधी और राहुल गांधी के पास 4 विकल्प हैं, लेकिन सबमें एक मुश्किल है। पहला विकल्प है कि कांग्रेस हाईकमान अशोक गहलोत को ही अध्यक्ष और मुख्यमंत्री दोनों पदों पर रहने दे। इससे चुनाव तक सियासी संकट टल जाएगा, लेकिन अशोक गहलोत फिर अध्यक्ष के तौर पर ज्यादा सक्रिय रहेंगे या मुख्यमंत्री पद पर ज्यादा काम करेंगे। यह भी देखने वाली बात होगी। इस विकल्प में बड़ी चिंता यह भी है कि कांग्रेस खुलेआम दोहराती रही है कि एक नेता एक पद की नीति को लागू किया जाएगा। ऐसे में गहलोत को दो पद देने से कांग्रेस अपनी ही घोषित नीति के चलते विरोधियों के निशाने पर आ जाएगी।

कांग्रेस के पास दूसरा विकल्प यह है कि गहलोत खेमे से ही किसी नेता को मुख्यमंत्री बनाया जाए। ऐसा होने पर अशोक गहलोत अध्यक्ष के तौर पर पूरा समय दे पाएंगे और राजस्थान की बगावत भी थम जाएगी। लेकिन इस विकल्प की समस्या यह है कि अशोक गहलोत का खेमा तो मान जाएगा, लेकिन सचिन पायलट खेमा अपने बगावत पर कायम रहेगा। इस स्थिति में राजस्थान में कांग्रेस की हालत पंजाब जैसी ही हो जाएगी, जहां चन्नी और नवजोत सिंह सिद्धू की आपसी कलह में पार्टी को करारी हार का सामना करना पड़ा। इसलिए पंजाब से सबक लेकर आगे बढ़ना भी कांग्रेस के लिए अहम रहेगा।

कांग्रेस हाईकमान के पास एक विकल्प यह भी है कि अध्यक्ष पद पर अशोक गहलोत को लाने का इरादा ही छोड़ दिया जाए। उनके स्थान पर किसी और नेता को अध्यक्ष बनाने का फैसला ले लिया जाए। इससे कांग्रेस को राजस्थान का सिय़ासी संकट टालने में फिलहाल मदद मिल सकती है क्योंकि विधानसभा चुनाव में अब एक साल से भी कम समय बचा है। ऐसे में गुटबाजी से बचना ही सबसे अहम् मुद्दा है। लेकिन इसके लिए पार्टी को नए सिरे से अध्यक्ष के तौर पर किसी और चेहरे की तलाश करनी होगी।

सचिन पायलट को अशोक गहलोत के तमाम विरोध के बावजूद भी कांग्रेस हाईकमान अपनी जिद दिखाने के लिए मुख्यमंत्री पद दे सकता है। हालांकि ऐसा करने पर पार्टी के आगे अशोक गहलोत की बगावत को बढ़ते देखने का विकल्प होगा। लेकिन इस फैसले से सोनिया और राहुल गांधी यह जरूर साबित कर सकते हैं कि असली बॉस अब भी वही हैं।

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