कम बिजली सप्लाई को लेकर सरकारी कंपनियों में छिड़ी जंग

कम बिजली सप्लाई को लेकर सरकारी कंपनियों में छिड़ी जंग

कोयले की कमी सहित अन्य संसाधनों की कमतरता के चलते बिजली निर्माण में दिक्कत। महावितरण को सुचारू बिजली व्यवस्था के लिए सरकारी आदेश जारी 

योगेश पाण्डेय – संवाददाता 

मुंबई : बिजली की कम आपूर्ति को लेकर राज्य सरकार की कंपनियों के बीच विवाद खड़ा हो गया है, जिसके चलते महावितरण ने महानीर्ति को पत्र द्वारा सूचित करते हुए संज्ञान लेने को कहा है। कॉन्ट्रैक्ट के मुताबिक बिजली आपूर्ति नहीं किए जाने पर महावितरण ने नाराजगी व्यक्त की है। महावितरण कंपनी विभिन्न स्रोतों से बिजली खरीदती है। लेकिन राज्य सरकार महानिर्मिती बिजली उत्पादन कंपनी महावितरण को ही बिजली बेच सकती है। महानिर्मिती सबसे अधिक मात्रा में तापीय ऊर्जा उत्पन्न करती है, इसके बाद हाइड्रो और गैस आधारित बिजली उत्पादन होता है। कंपनी की ताप विद्युत उत्पादन क्षमता लगभग 9,500 मेगावाट है। लेकिन कोयले की अनुपलब्धता के साथ-साथ अन्य संबंधित कारणों से कंपनी पूरी क्षमता से बिजली का उत्पादन करने में असमर्थ है। हालांकि महावितरण ने इस पर कड़ी नाराजगी जताई।

अनुबंध के अनुसार 9,540 मेगावाट बिजली की आपूर्ति होने की उम्मीद है, लेकिन महाराष्ट्र विद्युत नियामक आयोग के 2019 के आदेश के अनुसार, कम से कम 80 प्रतिशत बिजली की आपूर्ति होने की उम्मीद है। तदनुसार, कम से कम 8,500 मेगावाट बिजली की आपूर्ति होनी चाहिए। लेकिन कंपनी ने पीक डिमांड के दौरान 4,153 मेगावाट तक की कम आपूर्ति की है। पीक डिमांड के दौरान कंपनी विभिन्न बिजली उत्पादन परियोजनाओं से औसतन 70 प्रतिशत से अधिक बिजली की आपूर्ति नहीं कर रही है। इससे महावितरण को घाटे की पूर्ति के लिए बाजार से 12 रुपये प्रति यूनिट के महंगे दाम पर बिजली खरीदनी पड़ रही है। महावितरण ने पत्र में कहा कि इस तरह के गंभीर मामले पर तत्काल ध्यान दिया जाए और आयोग के आदेश का पालन करते हुए बिजली आपूर्ति सुचारू की जाए।

त्योहारों के सीजन, बढ़ती गर्मी आदि कारणों से राज्य में बिजली की मांग काफी बढ़ गई है। वहीं, महानिर्मिती से बिजली की आपूर्ति कम होने के कारण महावितरण को बाहर से 400 से 600 मेगावाट बिजली महंगी दर पर खरीदनी पड़ रही है। बाजार से महंगी बिजली खरीदने से बचने के लिए महावितरण अब अपेक्षाकृत सस्ते दामों पर बाहर से बिजली खरीदेगा। इसमें से 1 से 31 अक्टूबर तक 100 मेगावाट बिजली, 1 से 31 मार्च 2023 तक 300 मेगावाट बिजली, 1 से 30 अप्रैल 2023 तक 400 मेगावाट बिजली, और अन्य 400 मेगावाट बिजली 1 से 31 मई 2023 तक औसतन 7.44 रुपये की बिजली 7.85 प्रति यूनिट द्वारा क्रय किया जायेगा। इस खरीद को महाराष्ट्र विद्युत नियामक आयोग ने मंजूरी दे दी है।

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