कोविशील्ड वैक्सीन के साइड इफेक्ट्स मामले पर, सीरम और बिल गेट्स को कोर्ट की नोटिस

कोविशील्ड वैक्सीन के साइड इफेक्ट्स मामले पर, सीरम और बिल गेट्स को कोर्ट की नोटिस

मृतक छात्रा के पिता ने लगाया सरकारी एजेंसियों पर लापरवाही का आरोप। कोर्ट ने राज्य और केंद्र सरकार से भी मांगा स्पष्टीकरण

योगेश पाण्डेय – संवाददाता 

मुंबई : कोरोना वैक्सीन का डोज लेने के कारण हुई मेडिकल स्टूडेंट की मौत के आरोप के चलते छात्रा के पिता ने 1000 करोड़ रुपये के मुआवजे के लिए उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया है, जिसमें दावा किया गया है कि उसकी बेटी की मौत कोरोना वैक्सीन के साइड इफेक्ट के कारण हुई है। कोर्ट ने इस याचिका पर संज्ञान लेते हुए सीरम इंस्टीट्यूट, माइक्रोसॉफ्ट के संस्थापक बिल गेट्स और अन्य प्रतिवादियों को नोटिस जारी करते हुए याचिका पर स्थिति स्पष्ट करने का भी आदेश दिया गया है।

सीरम को कोविशील्ड वैक्सीन के उत्पादन के लिए बिल गेट्स फाउंडेशन द्वारा वित्त पोषित किया गया था। इसलिए याचिकाकर्ताओं ने इस मामले में गेट्स को प्रतिवादी भी बनाया है। इसके अलावा केंद्र और राज्य सरकारों को भी प्रतिवादी बनाया गया है। याचिकाकर्ता ने प्रतिवादियों से नुकसान की भरपाई की मांग की है।

न्यायमूर्ति एस. वी. गंगापुरवाला और न्यायमूर्ति माधव जामदार की पीठ ने पिछले हफ्ते सीरम इंस्टीट्यूट और बिल गेट्स सहित अन्य प्रतिवादियों को नोटिस जारी कर याचिका पर अपना रुख स्पष्ट करने को कहा। गेट्स की ओर से वकील स्मिता ठाकुर ने कोर्ट को बताया कि वह इस नोटिस को स्वीकार करते हैं। औरंगाबाद के रहने वाले दिलीप लूनावत ने हाईकोर्ट की बॉम्बे बेंच के समक्ष यह याचिका दायर की है। जिसमें कहा गया है कि पिछले साल जनवरी के महीने में मेरी बेटी ने कोविशील्ड वैक्सीन ली थी। हालांकि लूनावत ने याचिका के जरिए दावा किया है कि बच्ची की मौत वैक्सीन के साइड इफेक्ट की वजह से हुई है।

उनकी बेटी स्नेहल नासिक के एक मेडिकल कॉलेज में पढ़ रही थी। केंद्र सरकार ने कोरोना की वैक्सीन आने के बाद सभी स्वास्थ्य कर्मियों को प्राथमिकता से टीकाकरण देने के फैसले की घोषणा की थी। उसी के तहत मेरी बेटी ने भी कॉलेज में ही वैक्सीन की दोनों डोज लीं। याचिका में यह भी कहा गया है कि स्नेहल को टीकाकरण से पहले बताया गया था कि टीका पूरी तरह से सुरक्षित है और इससे शरीर को कोई खतरा नहीं है।

भारत के औषधि महानियंत्रक (DCDI), अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान निदेशक और केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा कोरोना के खिलाफ टीका सुरक्षित होने का झूठा आश्वासन दिया गया था। याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया है कि स्वास्थ्य क्षेत्र के अधिकारियों को वैक्सीन की मात्रा लेने के लिए मजबूर किया गया। आपकी बेटी ने 28 जनवरी 2021 को डोज दिया था। इसके साइड इफेक्ट के कारण 1 मार्च 2021 को उनकी मृत्यु हो गई। याचिकाकर्ता ने यह भी दावा किया कि टीकाकरण के बाद प्रतिकूल घटनाओं के अध्ययन के लिए केंद्र सरकार की समिति ने स्वीकार किया है कि लड़की की मौत कोविशील्ड वैक्सीन के साइड इफेक्ट के कारण हुई थी। याचिकाकर्ता ने कहा कि उसने अपनी बेटी को न्याय दिलाने और लापरवाह सरकारी एजेंसियों से लोगों की जान बचाने के लिए यह याचिका दायर की गई है।

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