संजय राउत चाहते तो जो शिवसेना में हुआ, वह नहीं होता

संजय राउत चाहते तो जो शिवसेना में हुआ, वह नहीं होता

सम्मान पूर्वक बुलाया तो आज भी मातोश्री जाने से परहेज नहीं

बागी विधायकों के बदले सुर, उद्धव ठाकरे की तारीफ तो संजय राउत पर साधा निशाना, अजित पवार की भी आलोचना

योगेश पाण्डेय – संवाददाता 

मुंबई : राज्य में पिछले 15 दिनों से जारी सत्ता संघर्ष नई सरकार के गठन के बाद भले ही थम गया हो लेकिन बागी विधायकों का दर्द अभी भी नहीं थमा है। एक एक कर सभी बागी विधायक अपना दुख बयान कर शिवसेना के फूटने का रोना रो रहे है। शिवसेना सांसद संजय राउत की वजह से बगावत करने का वक्त आया। आदित्य ठाकरे हमसे मिलने सूरत आ रहे थे लेकिन केवल संजय राउत की वजह से नहीं आ सके। संजय राउत पर निशाना साधते हुए शिवसेना के बागी विधायक संजय राठौड़ ने कहा। हम फिर मुंबई आ रहे थे लेकिन राउत ने जोर शोर से हमारा विरोध और हम पर टिप्पणी करना शुरू कर दिया। राठौड़ ने दावा किया की संजय राउत की वजह से आदित्य ठाकरे सूरत नहीं आए वरना आज स्थिति कुछ और होती।

एकनाथ शिंदे के नेतृत्व में हममें से 40 लोगों ने जो भूमिका निभाई वह बगावत नहीं बल्कि एक विरोध था। राठौर ने कहा, अगर हमारे लिए ‘मातोश्री’ के दरवाजे गरिमा के साथ खोले गए, तो हम सब वापस लौट आएंगे। संजय राउत की वजह से ही यह समय हम पर आया। उद्धव ठाकरे के लिए हमारे मन में सम्मान और प्यार है। मैंने, गुलाबराव पाटिल और दादा भुसे ने उद्धव ठाकरे को समझाया था। उन्होंने पैनल पर भी हमारी बात रखी। आदित्य ठाकरे हमसे मिलने सूरत आ रहे थे। लेकिन साथ ही राउत ने बहुत जोरदार तरीके से हमारा विरोध करना और हमारे प्रति जहर उगलना शुरू कर दिया, जिसके चलते सभी ने में बदल लिया।

मुंबई से निकलने के बाद हम सूरत में रुके, फिर हमें पार्टी नेतृत्व से बात करनी पड़ी। हमें वापसी की गारंटी थी। लेकिन संजय राउत ने बहुत जोर से बोलना शुरू किया। आदित्य ठाकरे हमारे मार्गदर्शन के लिए सूरत आ रहे थे। लेकिन अचानक उनकी जगह रवींद्र फाटक और मिलिंद नार्वेकर को भेज दिया गया। राठौड़ ने आरोप लगाया कि राउत की वजह से ही आदित्य और हमारी संभावित मुलाकात फीकी पड़ गई।

संजय राउत के रोज सुबह होने वाले भजन-कीर्तन से सभी विधायक तंग आ गए थे। संजय राउत शिवसेना को खत्म करना चाहते थे, महेश शिंदे ने कहा। महेश शिंदे ने कहा कि संजय राउत ने विधायकों के मुद्दे को प्यार से संभाला होता तो जो हुआ वह नहीं होता।

विधायक महेश शिंदे ने बगावत के बाद भी शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे के काम की तारीफ करते हुए कहा उद्धव ठाकरे ने कोरोना की लहर में मुख्यमंत्री के रूप में बहुत अच्छा काम किया। महेश शिंदे ने उद्धव की तारीफ करते हुए एनसीपी नेता और तत्कालीन उपमुख्यमंत्री अजित पवार पर निशाना साधा है।

अजित पवार जब वित्त मंत्री थे तो उन्होंने राकांपा विधायकों को ज्यादा फंड दिया। राज्य ने 15 दिनों तक जो देखा वह दो साल में शिवसेना विधायकों के साथ एनसीपी के व्यवहार का परिणाम था। एनसीपी ने उद्धव ठाकरे की बीमारी का फायदा उठाया और शिवसेना कार्यकर्ताओं को परेशान किया, महेश शिंदे ने कहा।

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