महाराष्ट्र में बैकफुट पर भाजपा, शिंदे गुट के नेताओं को नहीं तोड़ने का फैसला

महाराष्ट्र में बैकफुट पर भाजपा, शिंदे गुट के नेताओं को नहीं तोड़ने का फैसला

शिंदे गुट के मंत्रियों और नेताओं समेत पदाधिकारियों में भाजपा के प्रति नाराजगी के चलते, भाजपा नेताओं को संयम रखने का निर्देश

योगेश पाण्डेय – संवाददाता 

मुंबई : गौरतलब है क़ि भाजपा ने शिवसेना के बागी शिंदे गुट के समर्थन से राज्य में अपनी सरकार बनाई है, लेकिन जमीनी स्तर पर दोनों दलों के बीच टकराव के कई मामले सामने आ चुके हैं। इस टकराव के चलते शिंदे गुट और भाजपा एक दूसरे के पार्षदों, पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं को अपने साथ जोड़ने में लगे हैं। इस राजनीतिक प्रतिद्वनंदिता के चलते शिंदे गुट और भाजपा के बीच कड़वाहट बढ़ने की आशंका बढती जा रही है। इसी पृष्ठभूमि में अब भाजपा ने एक अहम फैसला लिया है।

राज्य में भाजपा के वरिष्ठ नेताओं ने अपने सभी मंत्रियों और नेताओं को शिंदे समूह के कार्यकर्ताओं और नेताओं को नहीं तोड़ने का निर्देश दिया है। साथ ही वरिष्ठ स्तर से भाजपा नेताओं को शिंदे समूह के विधायकों के निर्वाचन क्षेत्रों में घुसपैठ न करने के निर्देश भी दिए गए हैं। भाजपा नेतृत्व इस बात का ध्यान रख रहा है कि यह दरार टकराव में न बदल जाए।

आगामी कालखंड में राज्य के कई अहम् महानगर पालिकाओं के चुनाव होने वाले हैं, इस सिलसिले में हमेशा ‘चुनावी मोड’ में रहने वाली भाजपा ने इनकमिंग के जरिए अपनी ताकत बढ़ानी शुरू कर दी थी। शिवसेना के साथ-साथ राकांपा , कांग्रेस, शिंदे और उद्धव समूह के पदाधिकारियों और पार्षदों का भी भाजपा में समावेश कराया जा रहा था। शिंदे समूह द्वारा भाजपा कार्यकर्ताओं को करारा जवाब दिया जा रहा था। लेकिन, इससे महानगर पालिका चुनाव के दौरान शिंदे गुट और भाजपा के बीच दरार पैदा होने का डर सता रहा है। इसलिए अब कहा जा रहा है कि भाजपा नेताओं ने एक कदम आगे बढ़कर शिंदे गुट से समझौता कर लिया है।

महाविकास अघाड़ी सरकार के दौरान शिंदे गुट के शिवसेना विधायक राकांपा से खफा थे। उनका कहना था कि हमारे निर्वाचन क्षेत्रों में राकांपा नेताओं को ज्यादा फंड आवंटित कर उन्हें सशक्त बनाया जा रहा है। इसलिए शिवसेना के बागी कह रहे थे कि विधानसभा चुनाव में हमारे लिए राकांपा ही बड़ा खतरा है। लेकिन अब सवाल उठाया गया कि अगर भाजपा के साथ भी कामोंबेश यही स्थिति है तो दोनों में क्या अंतर है? शिंदे समूह और भाजपा के बीच विभाजनकारी राजनीति के भविष्य में नकारात्मक परिणाम देखने को मिल सकते हैं। इसलिए भाजपा ने अपने नेताओं और कार्यकर्ताओं को धैर्य रखने की सलाह दी है।

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