संजय राउत की बढ़ी मुश्किलें, ज़मानत याचिका पर ईडी ने जताया ऐतराज

संजय राउत की बढ़ी मुश्किलें, ज़मानत याचिका पर ईडी ने जताया ऐतराज

विशेष कोर्ट में किया ज़मानत देने का विरोध। 19 सितम्बर तक है न्यायिक कस्टडी 

योगेश पाण्डेय – संवाददाता 

मुंबई – कथित पत्रा चॉल घोटाले के सिलसिले में पिछले कई दिनों से जेल में बंद शिवसेना सांसद संजय राउत की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। राउत का जेल से बाहर निकलने का इतंजार और बढ़ने वाला है। इसकी वजह यह है कि ईडी ने ज़मानत का विरोध किया है। बॉम्बे सेशंस कोर्ट में ईडी ने संजय राउत की जमानत अर्जी का साफ विरोध किया है। राउत एक महीने से अधिक समय से न्यायिक हिरासत में हैं। वह फिलहाल आर्थर रोड सेंट्रल जेल में बंद है। गौरतलब है कि घोटाले के आरोप में संजय राउत 31 जुलाई से ईडी की गिरफ्त में हैं। ईडी की विशेष अदालत ने पांच सितंबर को राउत की हिरासत 19 सितंबर तक बढ़ाने का आदेश दिया था।

पिछली सुनवाई में विशेष अदालत ने आदेश दिया था कि ईडी को राउत की जमानत अर्जी पर अपनी स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। कोर्ट के इस आदेश के बाद अब ईडी ने अपना जवाब दाखिल किया है। जवाब में ईडी ने राउत की जमानत अर्जी का साफ विरोध किया है। वहीं इससे पहले संजय राउत ने विशेष अदालत में दावा किया कि ईडी जांच जारी रख सकती है, लेकिन उन्हें जेल में रखने से कुछ नहीं होगा। राउत के वकील ने विशेष अदालत में अपनी जमानत अर्जी दाखिल की थी। उन्होंने इस पर तत्काल सुनवाई की भी मांग की। हालांकि कोर्ट की व्यस्तता के चलते जमानत अर्जी पर तुरंत सुनवाई नहीं हो सकी।

साल 2007 में महाराष्ट्र हाउसिंग ऐंड डिवेलपमेंट अथॉरिटी (महाड़ा) ने चॉल में रहने वाले परिवारों को स्थायी घर देने के लिए फ्लैट बनाकर देने की योजना शुरू की थी। यह काम गोरेगांव के सिद्धार्थ नगर में होना था। पत्रा चाल के रिडिवेलपमेंट का काम गुरु आशीष कंस्ट्रक्शन कंपनी को दिया गया था। म्हाडा की 47 एकड़ की जमीन में 672 घर बने हैं। कंपनी को साढ़े तीन हजार फ्लैट बनाकर देने थे। म्हाडा का प्लान था कि फ्लैट बनने के बाद जो जमीन बचेगी उसे बेच दिया जाएगा। हालांकि 14 साल के बाद भी कंपनी ने यहां फ्लैट नहीं बनाए। आरोप है कि गुरु आशीष कंस्ट्रक्शन कंपनी ने म्हाडा के साथ धोखाधड़ी की और बिना फ्लैट बनाए ही जमीन बिल्डरों को बेच दी। इससे उसे 901 करोड़ रुपये से ज्यादा का मुनाफा हुआ।

आरोप है कि कंपनी ने बाद में दूसरा प्रोजेक्ट शुरू किया और खरीदारों से 138 करोड़ रुपये जुटा लिए। कंपनी ने गलत तरीके से 1034 करोड़ रुपये की कमाई की और अपने सहयोगियों में राशि का बंटवारा किया। यह कंपनी एचडीआईएल की सिस्टर कंपनी है। प्रवीण राउत इसमें डायरेक्टर थे।

साल 2018 में म्हाडा ने गुरु आशीष कंस्ट्रक्शन कंपनी के खिलाफ एफआईआर की और धोखाधड़ी का आरोप लगाया। यह मामला इकनॉमिक ऑफेंस विंग को दिया गया था। 2020 में प्रवीण राउत को गिरफ्तार किया गया जिसे संजय राउत का करीबी बताया जाता है। प्रवीण राउत सारंग और राकेश वधावन के साथ कंपनी का डायरेक्टर था। वधावन भाई पीएमसी बैंक घोटाले के भी आरोपी हैं।

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