भारत जोड़ने में लगी कांग्रेस के 8 विधायक टूटे, थामा भाजपा का दामन

भारत जोड़ने में लगी कांग्रेस के 8 विधायक टूटे, थामा भाजपा का दामन

आलाकमान की अनदेखी और पार्टी कार्यशैली से नाराज गोवा कांग्रेस के विधायकों ने छोड़ी पार्टी। दो तिहायी से ज्यादा होने के चलते दलबदल कानून नहीं होगा लागु

योगेश पाण्डेय – संवाददाता 

मुम्बई – कांग्रेस की भारत जोड़ो यात्रा के 6 वे दिन ही भाजपा ने कांग्रेस तोड़ो, भाजपा जोड़ो का नारा बुलंद कर दिया है। गोवा कांग्रेस के 11 में से 8 विधायकों ने बुधवार को पार्टी छोड़ दी। सभी विधायक मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत के साथ विधानसभा पहुंचे और स्पीकर रमेश तावड़कर को कांग्रेस से अलग होने की चिट्ठी सौंपी। इसके तुरंत बाद गोवा भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष सदानंद तनवड़े ने सभी विधायकों को भाजपा की सदस्यता दिलाई।

कांग्रेस छोड़ने वाले विधायकों में गोवा के पूर्व मुख्यमंत्री दिगंबर कामत, माइकल लोबो, देलिया लोबो, केदार नाइक, राजेश फलदेसाई, एलेक्सो स्काइरिया, संकल्प अमोलकर और रोडोल्फो फर्नांडीज शामिल है। बागी विधायकों की संख्या पार्टी के कुल विधायकों की संख्या के दो-तिहाई से ज्यादा है। इस वजह से इन विधायकों पर दल-बदल कानून भी लागू नहीं हो पायेगा।

गोवा में टूट के बाद कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा ने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा की भाजपा भारत जोड़ो यात्रा से डर गई है और ऑपरेशन कीचड़ करने में जुटी है। उन्होंने सोशल मीडिया पर पोस्ट लिख कर कहा भाजपा सिर्फ तोड़ सकती है। वहीं कांग्रेस प्रभारी दिनेश गुंडूराव ने लिखा की भाजपा द्वारा पैसे और सत्ता के दम पर लोकतांत्रिक सिद्धांतों की धज्जियां उड़ाई जा रही है।

10 मार्च 2022 को गोवा विधानसभा चुनाव के नतीजे आए थे। इनमें कांग्रेस को 40 में से 11 सीटें मिली थीं, लेकिन 7 महीने के भीतर ही पार्टी टूट गई। इसके पीछे की वजह कांग्रेस की 3 बड़ी गलतियां है।

चुनाव परिणाम आने के बाद कांग्रेस ने बाहर से आने वाले माइकल लोबो को नेता प्रतिपक्ष बनाया। लोबो चुनाव से पहले ही पार्टी में शामिल हुए थे। नेता प्रतिपक्ष की रेस में शामिल पूर्व मुख्यमंत्री दिगंबर कामत कांग्रेस हाईकमान के इस फैसले के खिलाफ नाराज चल रहे थे। उनकी नाराजगी को देखकर तय माना जा रहा था कि कांग्रेस में जरूर फुट पड़ेगी।

गोवा में हार के बाद कांग्रेस हाईकमान ने प्रदेश अध्यक्ष गिरीश चोडनकर से इस्तीफा ले लिया, लेकिन प्रदेश प्रभारी दिनेश गुंडूराव पर कोई कार्रवाई नहीं की। गुंडूराव से पार्टी के कई सीनियर चुनाव के पहले से नाराज चल रहे थे। इसी वजह से पार्टी ने पी चिदंबरम को कांग्रेस का ऑब्जर्वर बनाकर भेजा था।

गोवा कांग्रेस के नए अध्यक्ष अमित पाटकर को लेकर भी पार्टी में गुटबाजी तेज हुई थी, जिसका असर राष्ट्रपति चुनाव में देखने को मिला था, पार्टी के 4 विधायकों ने उस वक्त क्रॉस वोटिंग की थी। कांग्रेस ने इस पर भी डैमेज कंट्रोल का कदम नहीं उठाया।

इसी साल जुलाई में कांग्रेस ने पार्टी विरोधी साजिश में शामिल होने का आरोप लगाकर दिगंबर कामत और माइकल लोबो पर कार्रवाई की थी। उस वक्त कांग्रेस ने टूटने से बचने के लिए अपने 5 विधायकों को चेन्नई शिफ्ट कर दिया था।

विधानसभा चुनाव से पहले राहुल गांधी ने कांग्रेस के सभी उम्मीदवारों को 5 साल तक पार्टी नहीं छोड़ने की शपथ दिलाई थी। कांग्रेस ने इस दौरान सभी उम्मीदवारों से एक शपथ पत्र पर हस्ताक्षर भी करवाए थे। हलफनामा देते हुए विधायकों ने कहा था कि 5 साल तक पार्टी नहीं छोड़ेंगे और कांग्रेस में रहकर गोवा की जनता की सेवा करते रहेंगे।

इससे पहले 2019 में कांग्रेस के 15 में से 10 विधायक भाजपा में शामिल हुए थे। इसमें नेता विपक्ष चंद्रकांत कावलेकर भी शामिल थे। गोवा के मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत ने कांग्रेस के सभी बागी विधायकों को भाजपा में शामिल करवाया था।

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