शिवसेना – भाजपा के बाद, बिहारी नेता की राज ठाकरे से मुलाकात

शिवसेना – भाजपा के बाद, बिहारी नेता की राज ठाकरे से मुलाकात

बिहार विधान परिषद अध्यक्ष देवेशचंद्र ठाकुर ने शिवतीर्थ पर राज ठाकरे से कि मुलाकात। राजनीतिक गलियारों में नए समीकरणों पर चर्चा जोरों में

योगेश पाण्डेय – संवाददाता 

मुंबई – महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना अध्यक्ष राज ठाकरे, सिर्फ नाम हो काफी है यह कहना अतिश्योक्ति नहीं होगी। मनसे अध्यक्ष राज ठाकरे पिछले कुछ दिनों से लगातार चर्चा में बने हुए हैं। फिर चाहे उनके लालबाग के राजा के दर्शन का अंदाज हो या फिर राज्य के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे का खुद राज ठाकरे के घर जाकर उनके यहां गणपति का दर्शन और मुलाकात। गणेशोत्सव के अलावा भी पिछले कई दिनों से राज ठाकरे और भाजपा नेताओं की आए दिन हो रही मुलाकातों ने भी राज्य में राजनीतिक पंडितों के माथे पर बल ला दिया है। इन सबके बीच बिहार के नेता की राज ठाकरे से हुई मुलाकात ने सबको चौंका दिया है।

बिहार विधान परिषद के नवनिर्वाचित अध्यक्ष देवेशचंद्र ठाकुर ने दादर स्थित शिवतीर्थ पहुंचकर राज ठाकरे और उनकी धर्मपत्नी शर्मिला ठाकरे से मुलाकात की। ठाकरे दंपत्ति ने ठाकुर का पुष्पगुच्छ देकर स्वागत भी किया। राज ठाकरे द्वारा अपनी पार्टी महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना की स्थापना के पश्चात स्थानीय युवाओं के रोजगार के मुद्दे को बहुत ही आक्रमत तरीके से उठाते हुए उत्तर प्रदेश और बिहार से आने वाले परप्रांतीय युवाओं का विरोध किया था। राज ठाकरे का यह परप्रंतियों का मुद्दा भी खासा चर्चा में रहा था। इसी मुद्दे के विरोध के चलते कुछ महीने पहले राज ठाकरे के अयोध्या दौरे को उत्तर प्रदेश से भाजपा सांसद बृजभूषण सिंह ने चुनौती दी थी और राज ठाकरे को अपना अयोध्या दौरा रद्द करना पड़ा था। इसी पृष्ठिभूमि पर अब राज ठाकरे को उत्तर भारतीय और बिहार के युवाओं के प्रति सौम्य और सरल रवैया अपनाने के उद्देश्य से ठाकुर ने यह मुलाकात की है, ऐसी चर्च राजनीतिक हलकों में शुरू हो गई है।

बिहार विधान परिषद के नवनियुक्त सभापती देवेशचंद्र ठाकूर धाराप्रवाह मराठी बोलने वाले बिहारी है। कई वर्षों तक मुंबई में रहने और पुणे एवं नाशिक से अपनी पढ़ाई पूरी करने वाले ठाकुर बिहार से होने के बावजूद मराठी संस्कृति से जुड़े हुए नेता हैं।

देवेशचंद्र ठाकूर का जन्म बिहार के सीतामढ़ी और स्कूली शिक्षा हजारीबाग में हुई। आगे की पढ़ाई पूरी करने के चलते उन्होंने नाशिक स्थित मिलिट्री स्कूल में दाखिला लिया था। स्नातक तक कि शिक्षा उन्होंने पुणे के फर्ग्युसन कॉलेज से पूरी की, तत्पश्चात लॉ की डिग्री उन्होंने आयएलएस कॉलेज पुणे से प्राप्त की। पुणे में पढ़ाई के दौरान ही उन्होंने छात्र नेता का चुनाव भी लडा था जिससे उनकी नजदीकियां दिवंगत नेता और राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री विलासराव देशमुख से बढ़ गई और गहरा दोस्ताना हो गया।

इसके बावजूद राज्य की राजनीति में राजनीतिक पद प्राप्त करने की उनकी इच्छा पूरी नहीं हो सकी, 1990 के विधानसभा चुनाव में ठाकुर ने बिहार से कांग्रेस के उम्मीदवार के रूप में चुनाव भी लडा लेकिन सफलता नहीं मिल सकी। विलासराव देशमुख के मुख्यमंत्री कार्यकाल तक मंत्रालय में देवेश ठाकूर का अपना अलग ही दबदबा हुआ करता था। राज्य के राजनितिक क्षेत्र समेत मंत्रालय में भी ठाकुर मुख्यमंत्री के करीबियों में गिने जाने लगे थे। देवेश ठाकुर मुंबई के कुलाबा में रहते हैं। ठाकुर प्रदेश युवक काँग्रेस के उपाध्यक्ष भी रह चुके हैं। महाराष्ट्र में राजनीतिक करियर नहीं बना पाने के चलते अंततः देवेश ठाकुर ने अपने जन्मभूमि बिहार का रुख कर लिया।

बिहार विधान परिषद के अध्यक्ष से मुलाकात के बाद हिन्दी भाषियों के प्रति अपनाए गई विरोधी भूमिका पर सौम्य रवैया अपनाए जाने का प्रयत्न राज ठाकरे द्वारा किया जाएगा ऐसी चर्चा राजनीतिक गलियारों में शुरू हो गई है। एक ओर भाजपा नेताओं के साथ लगातार चल रही मुलाकातों से भाजपा-मनसे गठबंधन की चर्चाओं के बीच के बीच भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष चंद्रकांत पाटिल ने कहा था कि हिंदी भाषियों के प्रति राज ठाकरे के सख्त रवैए से भाजपा सहमत नहीं है।

इस लिए अब मनसे द्वारा हिंदुत्व का मुद्दा अपनाने के बाद हिंदी भाषियों के प्रति विरोध की भूमिका में सौम्यता देखने को मिल सकती है। राज ठाकरे और देवेश चन्द्र ठाकुर की मुलाकात राजनीतिक गलियारों में नए समीकरणों को जन्म दे दिया है।

Leave a Reply

Your email address will not be published.

पुलिस महानगर न्यूज़पेपर के लिए आवश्यकता है पूरे भारत के सभी जिलो से अनुभवी ब्यूरो चीफ, पत्रकार, कैमरामैन, विज्ञापन प्रतिनिधि की। आप संपर्क करे मो० न० 7400225100,8976727100
error: Content is protected !!
%d bloggers like this: