विधानसभा मानसून सत्र के आखिरी दिन सरकार पर भड़के आदित्य ठाकर

विधानसभा मानसून सत्र के आखिरी दिन सरकार पर भड़के आदित्य ठाकर

आदिवासी इलाकों में कुपोषण को लेकर सरकार का किया घेराव, आदित्य ठाकरे और सुधीर मुनगंटीवार में जुबानी जंग

आदिवासी विकास मंत्री के गैरजिम्मेदाराना बयान से नाराज मविआ का सदन से वॉकआउट

योगेश पाण्डेय – संवाददाता 

मुंबई : राज्य में सत्ता हस्तांतरण के बाद विपक्ष सत्ता पक्ष की जगह बैठा है और सत्ता पक्ष विपक्षी दल की बेंच पर बैठ गया है। इसके चलते इस साल का मानसून सत्र काफी गर्माहट भरा रहा। सत्र के पहले दिन से ही विपक्ष ने शिंदे-फडणवीस सरकार को घेरना शुरू कर दिया। सत्र के आखिरी दिन भी विधानसभा में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच घमासान देखने को मिला। इस घमासान में हमेशा शांत और संयमित रहने वाले शिवसेना नेता आदित्य ठाकरे का रौद्र रूप नजर आया

आज विपक्ष ने आदिवासी विकास मंत्री विजयकुमार गावित को कुपोषण के मुद्दे पर सदन में घेर लिया। विजयकुमार गावित ने बुधवार को जवाब दिया था कि राज्य में कुपोषण से एक भी मौत नहीं हुई है। इस पर कड़ी आपत्ति जताते हुए विरोधी पक्ष नेता अजीत पवार और दिलीप वलसे पाटिल ने मांग की कि मंत्री सही आंकड़े सदन में पेश करें और किसी को गुमराह न करे। इसके बावजूद भी गावित अपने इस बयान और दावे पर अडिग रहे कि कुपोषण से कोई मौत नहीं हुई। विधानसभा अध्यक्ष द्वारा उचित जानकारी के साथ जवाब देने के निर्देश दिए जाने के बाद सवाल सुरक्षित रखा गया था, लेकिन अगले दिन भी गावित ने वही जवाब दिया, जिससे विपक्ष नाराज हो गया।

तत्पश्चात आदित्य ठाकरे ने अपने भाषण में कहा कि देश में आदिवासियों का यही हाल है, जहां हमने एक आदिवासी राष्ट्रपति को चुना है। जो सत्ताधारी विधायक बैठे थे, उन्होंने कहा कि हमने उन्हें चुना है, आपको नहीं। आदित्य ठाकरे ने इसका कड़ा जवाब देते हुए कहा कि हमने भी उन्हें चुना है। इस दौरान आदित्य ठाकरे भाजपा विधायक के बयान पर काफी आक्रामक नजर आए।

ग्रामीणों के जवाब के बारे में बात करते हुए आदित्य ठाकरे ने कहा, ‘हमें शर्म आनी चाहिए कि आदिवासी इलाकों में हालात कैसे हैं, आरक्षित जवाब के बावजूद एक ही जवाब दिया जा रहा है, क्या मंत्री नई समिति का गठन कर समाधान खोजने का प्रयत्न कर रहे हैं ? हालांकि भाजपा नेता और मंत्री सुधीर मुनगंटीवार ने आदित्य द्वारा इस्तेमाल किए गए ‘शर्म’ शब्द पर कड़ी आपत्ति जताते हुए बेहद आक्रामक रुख अख्तियार कर लिया जिसके चलते सदन में हंगामा मच गया।

सुधीर मुनगंटीवार ने आदित्य ठाकरे के बयान पर कड़ी आपत्ति जताई, हम अपने वरिष्ठ के बारे में ऐसा कैसे बोल सकते है। मुनगंटीवार की आलोचना के बाद राकांपा नेता और विधायक जयंत पाटिल ने आदित्य ठाकरे का पक्ष लेते हुए तर्क दिया कि आदित्य ठाकरे ने स्थिति पर टिप्पणी की थी और यह मंत्री के बारे में बयान नहीं था। तब आदित्य ठाकरे ने भी इस पर सफाई देते हुए कहा, ‘सुधीर भाऊ के भाषणों को सुनकर मैं प्रेरित हुआ, मैंने तो सिर्फ इतना कहा कि आजादी के 75वें साल में यह स्थिति है, मैं सरकार को दोष नहीं देना चाहता, बल्कि एक नेता के तौर पर यह शर्म की बात है, इसमें मेरी क्या गलती है? मैंने किसी पर उंगली नहीं उठाई, हमें केवल नेताओं के रूप में काम करना चाहिए।

आदिवासी मंत्री के गैर जिम्मेदाराना और निंदनीय बयान के विरोध में राकांपा विधायकों ने विधानसभा का बहिष्कार किया, उसके बाद महाविकास अघाड़ी के सभी विधायक सदन से बाहर चले गए।

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