महाराष्ट्र की शिंदे सरकार का बड़ा फैसला, दही हांडी को खेल का दर्जा

महाराष्ट्र की शिंदे सरकार का बड़ा फैसला, दही हांडी को खेल का दर्जा

गोविंदाओं को मिलेगा नौकरियों में आरक्षण, दही हांडी के दौरान घायल को 5 लाख और मृतक को 10 लाख तक का मुआवजा देगी सरकार

योगेश पाण्डेय – संवाददाता 

मुंबई – महाराष्ट्र में दही हांडी का उत्सव बड़े धूमधाम से मनाया जाता है। खासकर मुंबई शहर में इस त्योहार की अपनी अलग ही व्याख्या है। यह माना जाता है कि नवी मुंबई के पास घणसोली गांव में यह परंपरा पिछले 104 साल से चली आ रही है। यहां सबसे पहले 1907 में कृष्ण जन्माष्टमी के मौके पर दही हांडी शुरू हुई थी। मायानगरी में हर साल होने वाली दही हांडी उत्सव की धूम पूरी दुनिया में हैं। सिर्फ देश ही नहीं विदेश से भी लोग मुंबई की दही हांडी उत्सव को देखने आते हैं।

राज्य के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने विधानसभा सत्र के दौरान गुरुवार को बताया कि खो खो और कबड्डी की तरह ही अब महाराष्ट्र में दही हांडी को एक खेल का दर्जा दिया गया है। इसे एडवेंचर स्पोर्ट्स का एक प्रकार माना जाएगा। मुख्यमंत्री ने आगे बताया कि दही हांडी में शामिल होने वाले गोविंदाओं को सरकारी योजनाओं का लाभ, सरकारी नौकरियों में 5 फीसदी आरक्षण भी दिया जाएगा। जल्दी ही प्रो कबड्डी के नियमों के आधार पर राज्य में दही हांडी प्रतिस्पर्द्धा भी शुरू की जाएगी।

कुछ दिन पहले ही मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने दही हांडी उत्सव के दिन सार्वजनिक छुट्टी घोषित करने का ऐलान किया था। सरकार ने इस संदर्भ में एक सरकारी आदेश भी जारी किया है। खास बात यह है कि दही-हांडी अब सिर्फ गोकुलाष्टमी या जन्माष्टमी के वक्त ही नहीं बल्कि साल के 365 दिन एक एडवेंचर स्पोर्ट के तौर पर खेला जा सकेगा।

गोविंदाओं को अब बीमा संरक्षण भी दिया जाएगा। दही हांडी खेलते वक्त अगर दुर्घटना हो जाती है और ऐसे में किसी गोविंदा की मौत हो जाती है तो संबंधित गोविंदा के परिवार वालों को 10 लाख रुपए की रकम मदद के तौर पर दी जाएगी। गंभीर रूप से जख्मी होने पर 7 लाख 50 हजार रुपए की रकम मदद के तौर पर दी जाएगी। यानी अगर ऐसी किसी दुर्घटना में यदि कोई गोविंदा दोनों आंखें या दोनों पैर या दोनों हाथ या शरीर के कोई दो अहम अंग गंवा देता है तो उसे साढ़े सात लाख रुपए की रकम राज्य सरकार की ओर से मदद के तौर पर दी जाएगी। ऐसी किसी दुर्घटना में कोई गोविंद अगर एक हाथ या एक पैर या शरीर का कोई अंग गंवा बैठता है तो ऐसी स्थिति में उसे 5 लाख रुपए की रकम मदद के तौर पर सरकार की और से दी जाएगी।

इस उत्सव को श्रीकृष्ण जन्मोत्सव पर मनाया जाता है। लड़कों का ग्रुप मैदान, सड़क या कम्पाउंड में इकट्ठा होता है और वे पिरामिड बनाकर जमीन से 20-30 फुट ऊंचाई पर लटकी मिट्टी की मटकी को फाड़ते हैं। महाराष्ट्र और गुजरात में माखन हांडी की प्रथा काफी प्रसिद्ध है, जहां मटकी को दही, घी, बादाम और सूखे मेवे से भरकर लटकाया जाता है।

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