जनगणना से सभी समुदायों की सटीक आबादी का पता लगाने में मदद मिलेगी, ताकि सरकार द्वारा उसी के अनुसार अनुपातिक लाभ दिया जा सके – अजित पवार 

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जनगणना से सभी समुदायों की सटीक आबादी का पता लगाने में मदद मिलेगी, ताकि सरकार द्वारा उसी के अनुसार अनुपातिक लाभ दिया जा सके – अजित पवार 

भाजपा के विरोध करने के बावजूद उपमुख्यमंत्री की महाराष्ट्र में भी जातिगत जनगणना कराने की मांग 

योगेश पाण्डेय – संवाददाता 

मुंबई – महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार ने बिहार में कराई गयी जाती जनगणना की सराहना करते हुए कहा है कि महाराष्ट्र में भी इसकी जरुरत है। उन्होंने कहा कि जाती जनगणना से सभी समुदायों की सटीक आबादी का पता लगाने में मदद मिलेगी, ताकि सरकार द्वारा उसी के अनुसार अनुपातिक लाभ दिया जा सके। अजित पवार ने एक जनसभा को सम्बोधित करते हुए कहा कि राज्य सरकार मराठा समुदाय द्वारा आरक्षण दिए जाने की मांगों को लेकर सकारात्मक है। उन्होंने कहा कि मेरी राय है कि यहां भी जातीगत जनगणना होनी चाहिए, जैसे बिहार सरकार ने इसे लागु किया। इस प्रकार की कवायद से हमें अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी), अनुसूचित जाती (एससी), अनुसूचित जनजाती (एसटी), अल्पसंख्यकों और अन्य सामान्य वर्ग इत्यादि की सटीक जनसंख्या का पता लग जायेगा, क्योंकि जनसंख्या अनुपात के आधार पर ही सभी समुदायों को लाभ दिया जाता है।

अजित पवार ने बताया कि उन्होंने मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के साथ मिलकर बिहार में हुए जातिगत जनगणना का ब्यौरा माँगा है। पवार ने कहा कि यह कवायद महाराष्ट्र में की जानी चाहिए,भले ही इसमें कितना भी खर्च हो क्योंकि यह जनता के सामने स्पष्ट तस्वीर पेश करेगी। पवार ने यह भी कहा कि सरकार मराठा और धनगर समुदायों की आरक्षण की मांगों को लेकर सकारात्मक है लेकिन इस बात पर भी जोर दिया कि इस तरह के कदम से 62 प्रतिशत आरक्षण प्रभावित नहीं होना चाहिए। यह एसटी, एससी और ओबीसी के लिए 52 प्रतिशत, साथ ही आर्थिक रूप से कमजोर वर्गो के लिए 10 प्रतिशत है।

उपमुख्यमंत्री ने आगे कहा कि अगर मराठा और अन्य समुदायों को मौजूदा 52 प्रतिशत में से आरक्षण दिया जाता है, तो इस खंड में लाभ प्राप्त करने वाले समूहों को निराशा होगी। हमारा प्रयास यह सुनिश्चित करना है कि वर्तमान में 62 प्रतिशत से ऊपर प्रदान किया जा रहा आरक्षण हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में कानूनी रूप से टिक सके। पवार ने कहा कि मराठा आरक्षण की मांग करने वाले कार्यकर्ता मनोज जारांगे पाटिल ने मैराठों के लिए कुनबी प्रमाणपत्र माँगा है, ताकि मराठों को अन्य पिछड़ा वर्ग श्रेणी के तहत लाभ मिल सके, जबकि ओबीसी श्रेणी के कई समूह ज्ञापन सौंप रहे हैं कि उनके वर्ग में किसी अन्य समुदाय को शामिल नहीं किया जाना चाहिए। राकांपा नेता ने कहा कि धनगर समुदाय अनुसूचित जाती में शामिल किये जाने की मांग कर रहा है, जबकि आदिवासी इसका विरोध कर रहे हैं।

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